
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बीजेपी नेता और बिहार के पूर्व मंत्री Shahnawaz Hussain ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनके विरोधियों को भी यह समझ में आ चुका है कि आने वाले 50–60 सालों तक देश में बीजेपी का राजनीतिक प्रभाव मजबूत रहने वाला है। अपने भाषण में उन्होंने सरकार के कई बड़े फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि राम मंदिर निर्माण से लेकर अनुच्छेद 370 हटाने और ट्रिपल तलाक पर रोक तक, सरकार ने ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब देश में किसी की यह हिम्मत नहीं है कि वह गाय से जुड़े मामलों में कानून तोड़ सके और बच निकल जाए।
गाय और मीट एक्सपोर्ट पर दिया विवादित बयान
Shahnawaz Hussain ने अपने बयान में गाय और मीट एक्सपोर्ट को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश से गाय का मीट एक्सपोर्ट संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत से केवल बकरी का मांस ही निर्यात होता है और इसे लेकर गलत प्रचार किया जाता है। उन्होंने हरियाणा और बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि कई जगहों पर परंपरागत रूप से मांसाहार की संस्कृति रही है लेकिन गाय के प्रति भावनात्मक सम्मान हमेशा से बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मिथिला क्षेत्र में लोगों की जीवनशैली और खानपान विविध है लेकिन गाय की हत्या को लेकर कोई परंपरा नहीं रही है।

गाय को लेकर भावनात्मक और धार्मिक टिप्पणी
अपने भाषण में Shahnawaz Hussain ने गाय को लेकर भावनात्मक टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गाय को पशु घोषित करने की मांग कर रहे हैं जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस गाय को हिंदू समाज माता के रूप में पूजता है और जिसमें देवी देवताओं का वास माना जाता है उसे केवल पशु कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार में वर्तमान नेतृत्व के रहते गायों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है और अलग-अलग विचार सामने आने लगे हैं।
गौ-रक्षा और सामाजिक सद्भाव पर जोर
Shahnawaz Hussain ने अपने संबोधन में कहा कि गौ-रक्षा के नाम पर किसी भी तरह की हिंसा या बदतमीजी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि देश में कुछ लोग बीफ एक्सपोर्ट को लेकर गलत जानकारी फैलाते हैं जबकि असल में भैंस का मांस निर्यात होता है। उन्होंने धार्मिक उदाहरण देते हुए कहा कि कई जगहों पर पशु बलि की परंपरा भी रही है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी समुदाय को निशाना बनाया जाए। उन्होंने अंत में कहा कि गौ-रक्षा पूरे देश की भावना है और सभी को मिलकर इस मुद्दे पर एकजुट होकर काम करना चाहिए ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे।
