
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद प्रभारी भूपेश बघेल ने पूरे पंजाब में बस यात्रा की योजना का संकेत दिया है, जिससे पार्टी के भीतर नई राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
राहुल-प्रियंका से मिले भूपेश बघेल
पंजाब कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच राज्य प्रभारी भूपेश बघेल ने सोमवार, 24 अगस्त को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। बैठक को पंजाब में कांग्रेस की आगामी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
मुलाकात के बाद बघेल ने बताया कि चर्चा मुख्य रूप से पंजाब बस यात्रा की योजना को लेकर हुई। राहुल और प्रियंका ने उन्हें इसकी रूपरेखा तैयार करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
पूरे पंजाब को कवर करने की तैयारी
भूपेश बघेल के मुताबिक प्रस्तावित बस यात्रा छोटी नहीं होगी। इसका उद्देश्य पूरे पंजाब को कवर करना है। उन्होंने कहा कि यात्रा का शेड्यूल तैयार करने के बाद ही अंतिम तारीख तय होगी।
बघेल ने साफ किया कि यात्रा इसी सप्ताह शुरू होने की संभावना नहीं है। पहले पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से राय ली जाएगी। जिलाध्यक्षों से बातचीत के बाद उनकी रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपी जाएगी।

गुटबाजी के बीच एकजुटता का संदेश
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चाओं के बीच बघेल ने दावा किया कि बस यात्रा में सभी नेता शामिल होंगे। उन्होंने राहुल गांधी के भी यात्रा में शामिल होने की बात कही और बताया कि अन्य राष्ट्रीय नेताओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जब उनसे पार्टी में चल रही कथित खींचतान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब दिया—सब कुछ ठीक है। हालांकि सूत्रों का दावा है कि राहुल और प्रियंका के साथ बैठक में पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद को लेकर बघेल ने रिपोर्ट भी सौंपी है।
अकाली दल-BJP गठबंधन पर कांग्रेस का दावा
पंजाब की राजनीति में BJP और शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठबंधन की चर्चाओं पर भी बघेल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें इसलिए सामने आ रही हैं क्योंकि कांग्रेस मजबूत हो रही है।
उनका संकेत साफ था कि कांग्रेस खुद को 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूत दावेदार के तौर पर देख रही है।
2027 की तैयारी में जुटी कांग्रेस
पंजाब विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। बस यात्रा के जरिए पार्टी एक तरफ कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क बढ़ाना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ अलग-अलग जिलों में संगठन की स्थिति समझने की कोशिश करेगी।
अब देखना होगा कि रायशुमारी और हाईकमान की रणनीति के बाद कांग्रेस की बस यात्रा कब शुरू होती है और क्या यह पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को वास्तव में खत्म करने में कामयाब होती है।
