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भरत तिवारी श्रद्धांजलि सभा में उमड़ेगा जनसैलाब, आंदोलन के अगले चरण का होगा ऐलान

बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी की श्रद्धांजलि सभा और ब्रह्मभोज को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 30 जून को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में करीब 25 हजार लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। परिजनों और आयोजन समिति का दावा है कि बिहार के अलावा देश के कई राज्यों से समर्थक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिलौटी पहुंच रहे हैं। इसी मंच से आंदोलन के अगले चरण की घोषणा भी की जाएगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आएगी नई रणनीति

आयोजन समिति से जुड़े पंकज त्रिपाठी ने बताया कि भरत तिवारी की मौत के बाद से लगातार देशभर से लोग परिवार के समर्थन में गांव पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले हुई महापंचायत में 30 जून तक का समय तय किया गया था और अब उसी के अनुरूप आगे की रणनीति घोषित की जाएगी। मंगलवार सुबह 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी, जिसमें आंदोलन के अगले चरण, आगामी कार्यक्रमों और भविष्य की रूपरेखा की जानकारी दी जाएगी। समिति ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर आगे महापंचायत और विधानसभा घेराव जैसे बड़े कार्यक्रम भी किए जा सकते हैं।

भरत तिवारी श्रद्धांजलि सभा में उमड़ेगा जनसैलाब, आंदोलन के अगले चरण का होगा ऐलान

25 हजार लोगों के भोजन और व्यवस्था की तैयारी

श्रद्धांजलि सभा को लेकर गांव में बड़े स्तर पर तैयारियां की गई हैं। करीब 100 हलवाई और 300 सहायक भोजन तैयार करने में जुटे हैं। श्रद्धालुओं के लिए पूड़ी, बुनिया, दो प्रकार की सब्जी और चटनी की व्यवस्था की गई है। आयोजकों का कहना है कि अनुमान से अधिक लोग आने पर भी भोजन की कमी नहीं होगी। गर्मी को देखते हुए पेयजल के लिए पानी के टैंकर और बोतलबंद पानी की व्यवस्था की गई है। लोगों के बैठने के लिए विशाल वाटरप्रूफ पंडाल लगाया गया है तथा व्यवस्था संभालने के लिए आसपास के गांवों के लगभग 500 स्वयंसेवकों की ड्यूटी लगाई गई है।

‘भरतपुर’ नाम के पोस्टरों से चर्चा तेज

कार्यक्रम से पहले गांव और आसपास के क्षेत्रों में “भरतपुर में आपका स्वागत है” लिखे पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टरों में लिखा गया है कि “भरतपुर स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी जी के बलिदान को हमेशा याद करेगा।” इस पर आयोजन समिति का कहना है कि सरकार चाहे जो निर्णय ले, लेकिन आम लोगों के बीच भरत तिवारी को शहीद के रूप में देखा जा रहा है और स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर इस क्षेत्र को “भरतपुर” कहना शुरू कर दिया है।

परिवार ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने किसी से आर्थिक सहयोग की अपील नहीं की है, हालांकि स्वेच्छा से मिलने वाले सहयोग का स्वागत किया जा रहा है। श्रद्धांजलि सभा और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आंदोलन की नई रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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