
Uttarakhand में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल अभी से गर्म होने लगा है। Narendra Modi के नेतृत्व में भाजपा अब सनातन और चारधाम आस्था को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। बंगाल और असम में मिली बड़ी जीत के बाद पार्टी को भरोसा है कि धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दे उत्तराखंड में भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसी वजह से भाजपा ने खास तौर पर Kedarnath Temple और Badrinath Temple से जुड़े विधानसभा क्षेत्रों पर फोकस बढ़ा दिया है। फिलहाल केदारनाथ सीट भाजपा के पास है जबकि बदरीनाथ सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। पार्टी की कोशिश है कि अगले चुनाव में दोनों सीटों पर जीत हासिल कर पूरे देश में एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया जाए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाला चुनाव केवल विकास का नहीं बल्कि सनातन और आस्था की राजनीति का भी बड़ा रण बनने जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड कनेक्शन बना भाजपा की सबसे बड़ी ताकत
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां स्थित चारधाम देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। भाजपा इस धार्मिक पहचान को अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में देख रही है। प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड और खासकर बाबा केदार से जुड़ाव लगातार चर्चा में रहा है। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने केदारघाटी में समय बिताया था और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी कई बार केदारनाथ धाम पहुंचकर अपनी आस्था प्रकट की। केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना में उनकी व्यक्तिगत रुचि भी भाजपा लगातार जनता के सामने रखती रही है। केंद्र सरकार द्वारा चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को भी भाजपा अपने हिंदुत्व और विकास मॉडल से जोड़कर पेश कर रही है। पार्टी का मानना है कि इन परियोजनाओं से उत्तराखंड को देश की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में नई पहचान मिलेगी।

बदरीनाथ और केदारनाथ सीटों पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
आने वाले चुनाव में सबसे ज्यादा नजर बदरीनाथ और केदारनाथ विधानसभा सीटों पर रहने वाली है। भाजपा जहां बदरीनाथ सीट पर कब्जा जमाने के लिए नई रणनीति तैयार कर रही है वहीं केदारनाथ सीट को बचाना उसकी प्राथमिकता मानी जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस भी इन दोनों क्षेत्रों में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी ने हाल ही में चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों को अपने चुनावी दौरे में प्राथमिकता दी है। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों के जरिए संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस का मानना है कि अगर वह केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे आस्था से जुड़े क्षेत्रों में भाजपा को चुनौती देने में सफल रही तो इससे भाजपा के सनातन एजेंडे को बड़ा झटका लग सकता है। यही वजह है कि दोनों दल इन सीटों को प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
सनातन बनाम सियासत, उत्तराखंड चुनाव में दिखेगा बड़ा महासमर
उत्तराखंड का अगला विधानसभा चुनाव केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं बल्कि विचारधारा और धार्मिक पहचान की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा जहां सनातन और हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर आक्रामक रणनीति बना रही है वहीं कांग्रेस भाजपा को उसी मुद्दे पर घेरने की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चारधाम और धार्मिक पर्यटन से जुड़े मुद्दे चुनाव प्रचार के केंद्र में रह सकते हैं। भाजपा विकास और धार्मिक पुनर्जागरण का संदेश देगी जबकि कांग्रेस स्थानीय समस्याओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को आगे लाने की कोशिश करेगी। लेकिन यह साफ है कि केदारनाथ और बदरीनाथ की सीटें इस बार केवल विधानसभा क्षेत्र नहीं बल्कि पूरे देश की नजरों का केंद्र बनने वाली हैं। आने वाले महीनों में उत्तराखंड की राजनीति में सनातन और चुनावी रणनीति का यह टकराव और तेज होता दिखाई देगा।