गुजरात में शिक्षा को नई दिशा, मुख्यमंत्री ने शुरू किया निपुण गुजरात कार्यक्रम

गांधीनगर में आयोजित “शाला प्रवेशोत्सव-2026” और “कन्या केलवानी महोत्सव-2026” के दौरान गुजरात सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू कीं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 पर आधारित ‘राज्य पाठ्यक्रम ढांचा (SCF)’ और ‘विद्यालय गुणवत्ता मूल्यांकन एवं आश्वासन ढांचा (SQAAF)’ पुस्तकों का लोकार्पण किया। इनका उद्देश्य स्कूलों की गुणवत्ता का आकलन करना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। इसके साथ ही उन्होंने ‘निपुण गुजरात कार्यक्रम’ का भी शुभारंभ किया, जो अगले तीन वर्षों तक प्राथमिक शिक्षा को सशक्त बनाने पर केंद्रित रहेगा।
100 प्रतिशत नामांकन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि शाला प्रवेशोत्सव केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का अभियान है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और शिक्षकों से स्कूलों में 100 प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2003 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए की थी। उस समय स्कूल छोड़ने की दर लगभग 37 प्रतिशत थी, लेकिन लगातार प्रयासों के कारण आज स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

छात्राओं और विज्ञान के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। ‘नमो लक्ष्मी योजना’ के तहत कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को 50,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। वहीं ‘विज्ञान साधना योजना’ के तहत विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों को 25,000 रुपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य छात्राओं और विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहित करना है ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा की ओर बढ़ सकें।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने शिक्षकों और अभिभावकों से सामुदायिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों में स्वच्छता, अनुशासन और अच्छी आदतों का विकास बचपन से ही किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने भी पढ़ने, लिखने और गणितीय कौशल को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि केवल नामांकन ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शिक्षण परिणाम भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। कार्यक्रम के दौरान 298 स्वीकृत माध्यमिक विद्यालयों में से पांच स्कूलों के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को प्राधिकरण पत्र भी सौंपे गए।