
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के आरोपों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने 137 प्लॉट खरीदे, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ बताया जा रहा है। विपक्ष का दावा है कि इन जमीनों की खरीद ऐसे इलाकों में की गई है जहां सरकार की विकास परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने की इस्तीफे की मांग
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगते हैं तो जांच को निष्पक्ष बनाने के लिए पद छोड़ना एक नैतिक कदम माना जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए जांच प्रभावित हो सकती है।

क्या हैं जमीन खरीद से जुड़े आरोप?
रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री के परिवार के कई सदस्यों के नाम पर जमीन खरीदने के आरोप लगाए गए हैं। इनमें उनकी पत्नी, पुत्रवधू, भाई और अन्य रिश्तेदारों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि वर्ष 2024-25 के दौरान 168 एकड़ भूमि से जुड़े 137 प्लॉट खरीदे गए, जबकि 2021 से 2023 के बीच भी बड़ी मात्रा में भूमि खरीदी गई थी। विपक्ष का दावा है कि कुल मिलाकर परिवार से जुड़े लोगों के पास लगभग 335 एकड़ जमीन और 245 प्लॉट हैं।
सरकार ने आरोपों को बताया निराधार
राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जिन जमीनों का जिक्र किया जा रहा है, उनमें से अधिकांश निवेश और खरीद-फरोख्त राजनीति में आने या मुख्यमंत्री बनने से पहले की गई थी। सरकार का कहना है कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है और विपक्ष लगातार स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।