
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के सामने अब विपक्ष से ज्यादा अपनी ही अंदरूनी चुनौतियां खड़ी होती नजर आ रही हैं। संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती खींचतान, जल जीवन मिशन को लेकर उठते सवाल और स्थानीय स्तर पर गुटबाजी की चर्चाएं 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्र में लगातार दौरे और बैठकों के जरिए राजनीतिक समीकरण मजबूत करने की रणनीति शुरू कर दी है।
जल जीवन मिशन बना सबसे बड़ा विवाद
इस साल जनवरी में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और चरखारी से भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच जल जीवन मिशन की बदहाल स्थिति को लेकर हुई तीखी बहस सुर्खियों में रही। इसके बाद पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से पेड़ों की कटाई, अवैध खनन और विकास से जुड़े मुद्दों पर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने यहां तक कहा कि अलग राज्य बने बिना बुंदेलखंड का समुचित विकास संभव नहीं है। हमीरपुर में भाजपा विधायक मनोज प्रजापति की अधिकारियों से जल जीवन मिशन को लेकर हुई कहासुनी ने भी स्थानीय असंतोष को उजागर किया।

कई जिलों में गुटबाजी की चर्चा
बांदा, चित्रकूट, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर सहित कई जिलों में संगठन और नेताओं के बीच मतभेद की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। चित्रकूट में पूर्व सांसद आर.के. सिंह पटेल और पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय के समर्थकों के बीच गुटबाजी की चर्चा है, जबकि संगठन में पद न मिलने से नाराज नेताओं की नाराजगी भी खुलकर सामने आ रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड की चार सीटों में से भाजपा केवल झांसी सीट ही जीत सकी, जबकि तीन सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी।
CM योगी के दौरे पर टिकीं निगाहें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 और 9 जुलाई को बांदा और चित्रकूट के दौरे पर रहेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान वे संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को भी अंतिम रूप देंगे। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी में किसी तरह की गुटबाजी नहीं है और सभी कार्यकर्ता जनता के हित में मिलकर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष इन मुद्दों को लेकर भाजपा को लगातार घेरने की कोशिश कर रहा है।
