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भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: भाभी ने एसपी और एसडीएम पर लगाए हत्या की साजिश के आरोप, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

बिहार के भोजपुर जिले में चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले ने नया मोड़ ले लिया है। भरत तिवारी के परिजनों ने अब सीधे प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भरत की भाभी सुमन देवी ने दावा किया है कि यह एनकाउंटर नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी और श्राद्धकर्म पूरा होने के बाद परिवार हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।

एसपी और एसडीएम पर लगाए गंभीर आरोप

सुमन देवी ने भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज और जगदीशपुर के एसडीएम संजीत कुमार पर साजिश रचकर भरत तिवारी की हत्या कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भरत के पास कुछ ऐसे महत्वपूर्ण तथ्य और सबूत थे, जिनकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी। परिवार का आरोप है कि इन्हीं कारणों से उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला

परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि पुलिस शुरुआत में तीन गोलियां लगने की बात कह रही थी, जबकि रिपोर्ट में पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई है। सुमन देवी का आरोप है कि उनकी सास ने घटनास्थल पर तीन गोलियां चलते देखीं, जबकि दो अन्य गोलियां बाद में वाहन के अंदर मारी गईं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: भाभी ने एसपी और एसडीएम पर लगाए हत्या की साजिश के आरोप, हाईकोर्ट जाने की तैयारी

सीटिंग हाईकोर्ट जज की निगरानी में जांच की मांग

परिवार ने मांग की है कि मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बजाय हाईकोर्ट के कार्यरत (सीटिंग) न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच तभी संभव है जब पूरी प्रक्रिया स्वतंत्र निगरानी में हो। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि बिना उनकी सहमति के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जांच की जिम्मेदारी दी गई।

मां की बिगड़ी तबीयत, न्याय की मांग

भरत तिवारी की मां आशा देवी की तबीयत बेटे की मौत के बाद लगातार खराब बताई जा रही है। परिवार का कहना है कि उन्होंने खाना-पीना लगभग छोड़ दिया है और वे लगातार न्याय की मांग कर रही हैं। परिजनों का आरोप है कि घटना के कई दिन बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई।

श्राद्ध के बाद हाईकोर्ट में याचिका

परिवार ने बताया कि 30 जून को श्राद्धकर्म पूरा होने के बाद एक-दो दिनों के भीतर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी। इसमें पूरे मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच, संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की जाएगी। दूसरी ओर, मामले की जांच और सरकार द्वारा गठित न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

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