
केंद्रीय जांच ब्यूरो Central Bureau of Investigation ने मंगलवार को भारतीय सेना के एक कर्नल रैंक अधिकारी को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। आरोपी की पहचान कर्नल हिमांशु बाली के रूप में हुई है, जो आर्मी ऑर्डनेंस कोर की ईस्टर्न कमांड में तैनात थे। उन्हें कोलकाता से गिरफ्तार कर दिल्ली लाया जा रहा है। एजेंसी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर व्यापक जांच शुरू कर दी है।
डिफेंस सप्लायर से रिश्तों का खुलासा
एफआईआर के अनुसार कर्नल बाली के संबंध कानपुर स्थित डिफेंस सप्लायर कंपनी ‘ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड’ से गहरे बताए जा रहे हैं। इस कंपनी के मालिक अक्षत अग्रवाल और उनके पिता मयंक अग्रवाल पर आरोप है कि उन्होंने सेना के टेंडर हासिल करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दी। जांच एजेंसी का दावा है कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से नियमित संपर्क था और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

टेंडर मंजूरी और रिश्वत के आरोप
जांच में सामने आया है कि कर्नल बाली पर आरोप है कि उन्होंने टेंडर पास कराने, घटिया सामग्री के सैंपल को मंजूरी देने और बढ़े हुए बिलों को स्वीकृति देने के बदले रिश्वत ली। बताया गया कि मार्च और अप्रैल 2026 में एक बड़े टेंडर को कथित रूप से रिश्वत के बदले कंपनी को दिया गया। 22 अप्रैल को कोलकाता में एक अहम मुलाकात के बाद 24 अप्रैल को कंपनी को टेंडर मिल गया, जिससे संदेह और गहरा गया है।
हवाला और 50 लाख रुपये का लेनदेन
एफआईआर में यह भी दावा किया गया है कि रिश्वत की रकम हवाला नेटवर्क के जरिए दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचाई जा रही थी। करीब 50 लाख रुपये के लेनदेन की तैयारी की बात सामने आई है। इस मामले में केवल कर्नल बाली ही नहीं, बल्कि अक्षत अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, आशुतोष शुक्ला और नरेश पाल समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच Central Bureau of Investigation के डीएसपी सुनील कुमार की निगरानी में आगे बढ़ रही है और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।