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राम मंदिर चंदा विवाद पर अखिलेश यादव का हमला, SIT को किया सचेत

अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा और दान प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर इस मुद्दे पर योगी सरकार और जांच एजेंसी को निशाने पर लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए आशंका जताई कि जांच के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है और यहां तक कि जांच रिपोर्ट भी गायब हो सकती है।

SIT पर अखिलेश यादव का तंज

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में लिखा, “SIT ध्यान रखे, कहीं जांच की रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए। फिर कहा जाएगा कि 15 दिन और इंतजार कर लो। दिन इसलिए बढ़ाए जा रहे हैं क्योंकि सबूत ठिकाने लगाए जा रहे हैं।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष लगातार इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार निष्पक्ष जांच का भरोसा दे रही है।

जांच के दौरान कई लोगों से हुई पूछताछ

राम मंदिर दान और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अब तक मंदिर ट्रस्ट के कई पदाधिकारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार, जांच पूरी होने तक कुछ प्रमुख लोगों को अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश भी दिए गए हैं। जांच दल ने प्रारंभिक साक्ष्यों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद कई अहम बिंदुओं पर जानकारी जुटाई है।

राम मंदिर चंदा विवाद पर अखिलेश यादव का हमला, SIT को किया सचेत

आभूषणों और दान रिकॉर्ड में गड़बड़ी की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने, चांदी, हीरे और अन्य बहुमूल्य आभूषणों के रिकॉर्ड में कथित विसंगतियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारी इन आभूषणों और कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड को लेकर SIT को संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। हालांकि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

सरकार ने ट्रस्ट के आग्रह पर बनाई थी SIT

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के दान और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को SIT का गठन किया था। यह कदम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उठाया गया था ताकि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

रिपोर्ट का इंतजार, बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

राम मंदिर जैसे संवेदनशील और राष्ट्रीय महत्व के विषय से जुड़े इस मामले ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। एक ओर विपक्ष जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार और जांच एजेंसियां निष्पक्ष कार्रवाई का दावा कर रही हैं। अब सभी की निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।

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