भरत तिवारी एनकाउंटर पर परिवार का बड़ा बयान, मां बोलीं पहले न्याय चाहिए, भाई ने दोषियों को फांसी देने की मांग की

भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार की ओर से परिवार के एक सदस्य को नौकरी और मुआवजे के ऐलान के बाद अब परिजनों ने अपनी प्राथमिकता साफ कर दी है। परिवार का कहना है कि आर्थिक मदद से पहले उन्हें न्याय और दोषियों पर कार्रवाई चाहिए।
परिवार ने कहा- हमारी पहली मांग न्याय
भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। इसके बाद शुक्रवार को भरत के परिवार की प्रतिक्रिया सामने आई।
भरत की मां आशा देवी ने कहा कि परिवार की सबसे बड़ी मांग न्याय है। उनका कहना है कि घटना के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। परिवार इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहता है।
भाई ने की फांसी की मांग
भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने भी आर्थिक सहायता से ज्यादा न्याय को प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और फांसी दी जानी चाहिए।

नौकरी और मुआवजे के सवाल पर चंदन ने कहा कि परिवार ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। इस मुद्दे पर पूरा परिवार साथ बैठकर विचार करेगा। फिलहाल उनका जोर मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई पर है।
17 जून को हुई थी मौत
भरत भूषण तिवारी की 17 जून 2026 को भोजपुर के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान गोली लगने से मौत हुई थी। पुलिस के मुताबिक, वह हथियार लेकर मौजूद था और पुलिस टीम पर फायरिंग कर रहा था। पुलिस ने दावा किया कि जवाबी गोलीबारी आत्मरक्षा और लोगों की सुरक्षा के लिए की गई।
हालांकि, परिवार और स्थानीय लोगों ने पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो को लेकर दावा किया गया कि भरत ने हथियार फेंककर सरेंडर किया था। इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि उस समय नहीं हो सकी थी।
सरकार ने कराई न्यायिक जांच
विवाद बढ़ने के बाद बिहार सरकार ने मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच का आदेश दिया। जांच की जिम्मेदारी पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाले आयोग को दी गई। आयोग ने परिवार से मुलाकात कर उनके बयान भी दर्ज किए और घटना से जुड़े फोटो-वीडियो उपलब्ध कराने को कहा।
मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज होने की बात सामने आई।
नौकरी-मुआवजा बनाम न्याय की मांग
मुख्यमंत्री की ओर से नौकरी और आर्थिक सहायता का ऐलान परिवार के लिए राहत का कदम हो सकता है, लेकिन परिजनों की प्राथमिकता फिलहाल स्पष्ट है। वे चाहते हैं कि जांच पूरी हो और यदि किसी की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
यही वजह है कि भरत तिवारी का मामला सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं रह गया है। यह पुलिस कार्रवाई, जवाबदेही और न्यायिक जांच की निष्पक्षता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
अब जांच के नतीजे पर टिकी नजर
भरत तिवारी के परिवार की मांग और सरकार की ओर से की गई घोषणाओं के बीच अब सबसे अहम भूमिका जांच की है। घटना के वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस के दावों की जांच से ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
परिवार के लिए नौकरी और मुआवजा तत्काल राहत हो सकते हैं, लेकिन उनके शब्दों में असली मंजिल न्याय है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच आखिर किसे जिम्मेदार ठहराती है और कानून अपना अगला कदम कैसे उठाता है।
