
लोकसभा में नारी वंदन अधिनियम के 54 वोटों से गिरने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस के खिलाफ बड़ा अभियान बनाने का फैसला किया है। हरियाणा समेत भाजपा शासित राज्यों में अब विधानसभा के विशेष सत्र बुलाकर राजनीतिक घेराबंदी की रणनीति अपनाई जा रही है। इसी क्रम में हरियाणा सरकार ने 27 अप्रैल को एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है।
विधानसभा सत्र में निंदा प्रस्ताव और विधेयकों की तैयारी
हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार, इस विशेष सत्र में कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जा सकता है। भाजपा की रणनीति है कि संसद में हुए घटनाक्रम को आधार बनाकर विपक्ष को विधानसभा में भी घेरा जाए। वहीं कांग्रेस भी भाजपा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है, लेकिन विधानसभा में भाजपा के बहुमत को देखते हुए उसके प्रस्ताव के पारित होने की संभावना अधिक मानी जा रही है। इसके साथ ही ग्रुप डी कर्मचारियों के प्रमोशन और क्लेरिकल सर्विस से जुड़े विधेयक भी सत्र में पेश किए जा सकते हैं।

राज्यपाल से मुलाकात और प्रशासनिक तैयारियां तेज
विशेष सत्र की तैयारी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने चंडीगढ़ में राज्यपाल से मुलाकात की और संभावित कार्यसूची पर चर्चा की। इस मुलाकात के बाद विधानसभा सचिवालय को सत्र के आयोजन की सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि यह सत्र सुचारु रूप से संचालित हो और सभी विधायी कार्य बिना किसी बाधा के पूरे किए जाएं। प्रशासनिक स्तर पर भी इस सत्र को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने संसद में हाल की घटनाओं को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपना असली चेहरा दिखा दिया है और यह देश के इतिहास का एक काला अध्याय है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया है और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रखा गया। सीएम ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी कोई दान नहीं बल्कि उनका अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में महिला मतदाता इस राजनीति का करारा जवाब देंगी।