पंजाब में नशा मुक्ति केंद्रों में बढ़ी मरीजों की संख्या, रिहैबिलिटेशन नेटवर्क में 224% उछाल

पंजाब में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच सरकारी उपचार और रिहैबिलिटेशन केंद्रों तक पहुंचने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सरकारी रिहैबिलिटेशन केंद्रों में दाखिले 2024 के 2,644 से बढ़कर 2025 में 8,574 हो गए। वहीं नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिले भी 164 प्रतिशत से अधिक बढ़े हैं।
नशा मुक्ति केंद्रों में 164% से ज्यादा बढ़े दाखिले
राज्य सरकार के मुताबिक सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में वर्ष 2024 के दौरान 9,577 लोगों ने दाखिला लिया था। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 25,290 हो गई। यानी एक साल में दाखिलों में 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
यह रुझान 2026 में भी जारी है। जुलाई तक ही 14 हजार से ज्यादा लोग सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल हो चुके थे। सरकार इसे उपचार व्यवस्था के प्रति लोगों के बढ़ते भरोसे और जागरूकता का संकेत मान रही है।
रिहैबिलिटेशन केंद्रों में 224% का उछाल
सरकारी रिहैबिलिटेशन केंद्रों में भी दाखिलों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। 2024 में यहां 2,644 लोगों ने दाखिला लिया था, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 8,574 हो गई। इस तरह एक साल में दाखिलों में 224 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।
जुलाई 2026 तक ही 5,800 से ज्यादा लोग इन केंद्रों में पहुंच चुके थे। यह संख्या 2025 में दर्ज कुल दाखिलों की करीब 68 प्रतिशत है।
‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के बाद बढ़ी पहुंच
दाखिलों में यह तेजी मार्च 2025 में शुरू हुए ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के बाद देखने को मिली। अभियान का फोकस केवल नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को उपचार और रिहैबिलिटेशन से जोड़ने पर भी है।
इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि नशे की समस्या से जूझ रहे कई परिवार अब इसे छिपाने के बजाय संस्थागत उपचार की ओर बढ़ रहे हैं। लंबे समय तक नशे की समस्या झेलने वाले लोगों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
OOAT क्लीनिक में भी बढ़े नए रजिस्ट्रेशन
उपचार की बढ़ती पहुंच आउटपेशेंट ओपिओइड-असिस्टेड ट्रीटमेंट यानी OOAT क्लीनिक नेटवर्क में भी दिखाई दे रही है। नए रजिस्ट्रेशन 2024 में 13,033 थे, जो 2025 में बढ़कर 17,702 हो गए।
वहीं अगस्त 2026 तक 12,500 से ज्यादा नए मरीज OOAT क्लीनिकों में रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इससे पता चलता है कि लोग अस्पताल में भर्ती होने के बजाय जरूरत के मुताबिक आउटपेशेंट उपचार का विकल्प भी अपना रहे हैं।

11 हजार से ज्यादा लोगों को मिली कानूनी प्रतिरक्षा
राज्य सरकार ने उपचार और रिहैबिलिटेशन से जुड़े कानूनी प्रावधानों का भी इस्तेमाल किया है। सरकार के अनुसार 27 अगस्त 2026 तक 11 हजार से ज्यादा लोगों को NDPS अधिनियम की धारा 64A के तहत प्रतिरक्षा प्रदान की जा चुकी है।
यह प्रावधान नशे की लत से प्रभावित ऐसे लोगों के लिए कानूनी राहत का रास्ता देता है, जो मादक पदार्थों के सेवन या कब्जे से जुड़े मामलों में नामजद हैं और उपचार की प्रक्रिया अपनाते हैं।
सरकार ने बताए अभियान के तीन स्तंभ
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने दाखिलों में बढ़ोतरी को अभियान का उत्साहजनक संकेत बताया। उनके मुताबिक परिवार अब संस्थागत सहायता मांग रहे हैं और उपचार नेटवर्क उन लोगों तक पहुंच बनाने में सफल हो रहा है, जो पहले औपचारिक व्यवस्था से बाहर रह जाते थे।
मंत्री ने कहा कि ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, प्रभावित लोगों के लिए उपचार एवं रिहैबिलिटेशन और बच्चों को नशे से बचाने के लिए रोकथाम।
पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई का एक अहम पहलू अब उपचार तक पहुंच भी बनता दिख रहा है। बढ़ते दाखिले इस बात का संकेत हैं कि प्रभावित लोग और उनके परिवार मदद लेने के लिए आगे आ रहे हैं। चुनौती अब इस बढ़ती मांग के साथ उपचार की गुणवत्ता, निरंतरता और पुनर्वास को मजबूत बनाए रखने की है।
