पेरियार लाइब्रेरी में 1800 संदिग्ध किताबें! AI कंटेंट और फर्जी प्रकाशकों पर मचा बवाल

TAMILNADU NEWS(Speed bharat news): तमिलनाडु के कोयंबटूर में पेरियार के नाम पर बने एक लाइब्रेरी और साइंस सेंटर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पेरियार अरिवुलगम में किताबों की खरीद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि यहां कई ऐसी किताबें रखी गई हैं जिनके लेखक और प्रकाशक संदिग्ध हैं। कुछ किताबों को देखकर यह भी दावा किया जा रहा है कि इन्हें AI की मदद से तैयार किया गया है और इनकी गुणवत्ता बेहद खराब है।
यह मामला अब केवल किताबों की खरीद तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम यानी TVK और विपक्षी दल DMK के बीच इस मामले को लेकर आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। दोनों पार्टियां किताबों की इस खरीद के लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रही हैं।
तमिलनाडु के मंत्री राज मोहन ने शुक्रवार को बताया कि पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने साफ कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
इस विवाद में अगल विलक्कु नाम के प्रकाशक की करीब 1800 किताबें सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में हैं। साहित्य से जुड़े मुरुगन का कहना है कि उन्होंने चार दशक तक साहित्य की दुनिया में काम किया है लेकिन इस प्रकाशक का नाम पहले कभी नहीं सुना। इन किताबों का बड़ा हिस्सा लाइब्रेरी की चौथी मंजिल पर तमिल संग्रह में रखा गया है। कई किताबें हार्डबाउंड हैं और उनकी कीमत 1400 रुपये से भी ज्यादा बताई गई है।
मुरुगन ने एक किताब का उदाहरण भी दिया। नलदियार वाझकईयिन वाझकाट्टी नाम की करीब 300 पन्नों की किताब को सूर्या बालू नाम के लेखक की रचना बताया गया है। इसकी कीमत 1445 रुपये रखी गई है। किताब में नलदियार को तमिल कवि और दार्शनिक बताया गया है जबकि असल में नलदियार जैन साधुओं से जुड़े चार पंक्तियों वाले छंदों का संग्रह है।
मुरुगन ने अगल विलक्कु और फीनिक्स पब्लिकेशन्स के पते को भी फर्जी होने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि इन प्रकाशकों को केवल किताबें सप्लाई करने के लिए बनाया गया हो सकता है।
अब जांच के बाद ही साफ होगा कि किताबों की खरीद में कोई गड़बड़ी हुई है या नहीं और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है।