
दिल्ली में वोटर लिस्ट को लेकर चल रही प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अहम सवाल पूछा है। सुप्रीम कोर्ट का चुनाव आयोग से सवाल है कि जब लाखों लोग पहले से मतदाता थे तो उनके नाम दोबारा जोड़ने के लिए उन्हें फॉर्म 6 भरने को क्यों कहा जा रहा है। इस मामले में सुनवाई के दौरान करीब 43 लाख लोगों के नाम हटने का मुद्दा भी उठा है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों का नाम पहले से वोटर लिस्ट में था उन्हें नए मतदाता की तरह आवेदन करने के लिए कहना सही प्रक्रिया है या नहीं इस पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके बाद चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि किसी भी योग्य मतदाता को वोटर लिस्ट से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा। साथ ही नाम जोड़ने के आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख भी आगे बढ़ाई जाएगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि पुराने मतदाताओं से फॉर्म 6 भरवाने पर उन्हें गलत घोषणा करनी पड़ सकती है। इससे उनके लिए कानूनी परेशानी भी खड़ी हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि पहले से मतदाता रहे लोगों के लिए SIR का फॉर्म होना चाहिए। वहीं जिन लोगों का पता बदल गया है या पहले दर्ज जानकारी में बदलाव हुआ है उनके लिए फॉर्म 8 का विकल्प दिया जाना चाहिए।
इस दौरान वोटर लिस्ट में नामों की मैपिंग नहीं होने और तार्किक गड़बड़ियों के आधार पर नाम हटाए जाने का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह की विसंगतियों को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं दिया गया है। बिहार में SIR के मामले में भी यह मुद्दा फैसले के समय सामने नहीं था। इस पर आगे सुनवाई होगी।
दिल्ली में फिलहाल दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर 2026 रखी गई है। इनके निपटारे की अंतिम तारीख 30 नवंबर है जबकि अंतिम वोटर लिस्ट 4 दिसंबर को जारी होनी है। चुनाव आयोग के बयान के बाद इन तारीखों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। ऐसे में पुराने मतदाताओं के लिए आगे क्या व्यवस्था होती है इस पर सबकी नजर रहेगी।
