ट्रांसजेंडर अधिकार कानून पर सुप्रीम कोर्ट सख्त केंद्र सरकार से मांगा जवाब

ट्रांसजेंडर अधिकार कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका पर सुनवाई हुई है। महिला संगठन ने इस कानून के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे जैविक महिलाओं को मिलने वाले आरक्षण और कानूनी सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा इस पर भी विचार होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय कानून मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। यह याचिका विमेन्स डिक्लेरेशन इंटरनेशनल इंडिया नाम के संगठन ने दाखिल की है। संगठन ने अपनी याचिका में महिलाओं के लिए स्थानीय निकायों में आरक्षण जेलों में रखने की व्यवस्था और खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी जैसे मुद्दे उठाए हैं।
सुनवाई के दौरान संगठन की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने कहा कि उनकी याचिका महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा एक अलग नजरिया सामने रखती है। उनका कहना है कि ट्रांसजेंडर लोगों को भी बराबरी के अधिकार और जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए लेकिन महिलाओं के लिए पहले से तय खास सुरक्षा और सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।
याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर ट्रांसजेंडर व्यक्ति दावा कर सकते हैं या नहीं। इसके अलावा महिला जेलों में रखने के नियम महिलाओं के शौचालयों के इस्तेमाल और गिरफ्तारी या तलाशी के दौरान महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर भी चर्चा की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिकार संरक्षण संशोधन अधिनियम 2026 को चुनौती देने वाली दूसरी याचिकाएं भी पहले से अदालत में लंबित हैं। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि बार बार नई याचिकाएं आने से सुनवाई में देरी हो सकती है। हालांकि कोर्ट ने माना कि इस याचिका में महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा अलग पहलू सामने आया है।
केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इन सवालों पर भी अपना जवाब देगी। उन्होंने महिला जेलों में रखने और महिलाओं की तलाशी से जुड़े नियमों सहित कई कानूनी पहलुओं का जिक्र किया।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अब केंद्र सरकार के जवाब और आगे होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी। इस मामले में ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों के साथ महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और आरक्षण से जुड़े सवालों पर आगे चर्चा हो सकती है।
