
दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों के राजनीतिक भविष्य को लेकर शनिवार की बैठक ने नई उम्मीद जगाई है। GNLF नेता नीरज जिम्बा ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि गोरखा समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर जल्द संवैधानिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं।
अमित शाह से बैठक को बताया ऐतिहासिक
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के पूर्व विधायक और GNLF नेता नीरज जिम्बा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने पहाड़ी नेताओं और विभिन्न हितधारकों की बातों को गंभीरता से सुना। जिम्बा के मुताबिक, बैठक सकारात्मक रही और गोरखा मुद्दे के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है।
‘समाधान पूरी तरह संवैधानिक होगा’
नीरज जिम्बा ने कहा कि गोरखा समुदाय की मांग हमेशा संविधान के दायरे में रही है। उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्री ने भी भरोसा दिलाया है कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित राजनीतिक स्थायी समाधान पूरी तरह संवैधानिक होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रक्रिया को अब और तेज किया जाएगा।

सभी पक्षों ने रखी अपनी बात
बैठक में पहाड़ी क्षेत्र से जुड़े विभिन्न राजनीतिक दलों और हितधारकों ने अपनी मांगें और समस्याएं रखीं। जिम्बा के अनुसार, कई मुद्दों पर सर्वसम्मति से चर्चा हुई। गृह मंत्री ने सभी पक्षों की बात सुनी और प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत पर जोर दिया।
गोरखा समुदाय लंबे समय से दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों की राजनीतिक पहचान और अधिकारों को लेकर अपनी मांग उठाता रहा है। ऐसे में केंद्र के साथ हुई यह बैठक राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
22 अगस्त की तारीख का भी किया जिक्र
नीरज जिम्बा ने 22 अगस्त को बैठक होने को ऐतिहासिक संयोग बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1988 में इसी तारीख को सुभाष घीसिंग, पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र के बीच गोरखा समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। ऐसे में उसी तारीख को गृह मंत्री के साथ बैठक होना उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
अमित शाह की यह बैठक उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सुकना में हुई। इसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, GNLF प्रमुख मन घीसिंग, GJM प्रमुख बिमल गुरुंग, दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट और पहाड़ी क्षेत्र के कई भाजपा विधायक शामिल हुए।
अब आगे क्या होगा?
बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस ‘स्थायी राजनीतिक समाधान’ की बात की जा रही है, उसका स्वरूप क्या होगा। फिलहाल किसी अंतिम समाधान की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, पहाड़ी नेताओं के सकारात्मक रुख से यह संकेत जरूर मिला है कि दार्जिलिंग के पुराने राजनीतिक मुद्दे पर केंद्र और पहाड़ी नेतृत्व के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है।
