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GMCH में मरीज की मौत के बाद बवाल, पत्रकारों से दुर्व्यवहार के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

पश्चिम चंपारण के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH) में एक मरीज की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि घटना की कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों ने भी अपने साथ दुर्व्यवहार किए जाने का दावा किया है। पूरे घटनाक्रम ने अस्पताल प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मरीज की मौत के बाद बढ़ा तनाव

जानकारी के अनुसार, अस्पताल में भर्ती एक मरीज की मौत के बाद परिजनों ने जूनियर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। इसके बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। परिजनों का कहना है कि विरोध जताने पर उनके साथ मारपीट की गई और घायल होने के बावजूद उन्हें उचित उपचार नहीं मिला। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों ने लगाए आरोप

घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस और विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकार अस्पताल पहुंचे। पत्रकारों का आरोप है कि कवरेज के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। कुछ पत्रकारों ने दावा किया कि उनके मोबाइल फोन छीन लिए गए और उन्हें काम करने से रोका गया। इन आरोपों के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

GMCH में मरीज की मौत के बाद बवाल, पत्रकारों से दुर्व्यवहार के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

एफआईआर दर्ज कराने की मांग

पत्रकारों ने संबंधित थाने में आवेदन देकर मामले की शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, जिससे मीडिया कर्मियों में नाराजगी है। इस बीच पुलिस और अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल अस्पताल की कार्यप्रणाली और आंतरिक व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। यदि अस्पताल परिसर में ऐसी घटनाएं होती हैं, तो मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है। स्वास्थ्य संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है।

निष्पक्ष जांच की मांग तेज

स्थानीय लोगों, पत्रकार संगठनों और सामाजिक समूहों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मरीज की मौत से लेकर पत्रकारों के आरोपों तक हर पहलू की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

GMCH बेतिया का यह मामला केवल एक अस्पताल विवाद नहीं रह गया है। यह स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, प्रशासनिक जवाबदेही और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने ला रहा है। अब सभी की नजर जांच प्रक्रिया और प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हुई है।

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