डिग्री है लेकिन नौकरी नहीं बिहार में युवाओं की बेरोजगारी ने बढ़ाई चिंता

बिहार में युवा बेरोजगारी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में सामने आए PLFS 2025 के आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 15 से 29 साल के पढ़े लिखे युवाओं की बेरोजगारी दर 12.1 फीसदी दर्ज की गई है। यानी हर 100 युवाओं में करीब 12 ऐसे हैं जो नौकरी की तलाश कर रहे हैं लेकिन उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है।
बिहार में पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी हासिल करना आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं में काफी ज्यादा होड़ देखने को मिलती है। सीमित पदों के लिए लाखों उम्मीदवार आवेदन करते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार का इंतजार करना पड़ रहा है।
आंकड़ों में ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच भी बड़ा फर्क दिखाई देता है। ग्रामीण इलाकों में युवाओं की बेरोजगारी दर 9.8 फीसदी बताई गई है जबकि शहरों में यह आंकड़ा बढ़कर 31.3 फीसदी तक पहुंच जाता है। जानकारों के मुताबिक केवल पारंपरिक डिग्री होना अब नौकरी के लिए काफी नहीं है। युवाओं के पास कंप्यूटर और दूसरी आधुनिक तकनीकी जानकारी होना भी जरूरी हो गया है।
यहीं पर बिहार की स्कूली शिक्षा की एक बड़ी कमी सामने आती है। UDISE 2025 26 के आंकड़ों के अनुसार राज्य के 95285 स्कूलों में केवल 40960 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा मौजूद है। इसका मतलब करीब 57 फीसदी स्कूल ऐसे हैं जहां कंप्यूटर की सुविधा नहीं है।
आज के समय में नौकरी के लिए ऑनलाइन आवेदन से लेकर डिजिटल काम और दूसरी तकनीकी जरूरतों तक कंप्यूटर की जानकारी जरूरी हो गई है। ऐसे में स्कूल स्तर पर ही बच्चों को कंप्यूटर की सही जानकारी नहीं मिलना आगे चलकर उनके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
बिहार की श्रम बल भागीदारी भी राष्ट्रीय औसत 46 फीसदी के मुकाबले 34.3 फीसदी है। यानी बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में श्रम बाजार का हिस्सा ही नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे में बेरोजगारी के साथ शिक्षा और डिजिटल सुविधाओं की कमी भी युवाओं के भविष्य के लिए बड़ी चिंता बनकर सामने आ रही है।
