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पंजाब कांग्रेस में आज सबसे अहम बैठक, नेतृत्व विवाद और 2027 चुनावी रणनीति पर होगा मंथन

पंजाब कांग्रेस में पिछले करीब दस दिनों से जारी राजनीतिक हलचल के बीच शनिवार को पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल कुछ ही देर में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे। यह बैठक चंडीगढ़ के सेक्टर-4 स्थित कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हो रही है। इसे पार्टी के भीतर चल रहे नेतृत्व विवाद और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

भूपेश बघेल के आने से पहले पहुंचे 70 से अधिक नेता

बैठक शुरू होने से पहले ही चन्नी समर्थक खेमे के पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेताओं सहित लगभग 70 से 80 नेता बैठक स्थल पर पहुंच चुके हैं। दिनभर नेताओं के आने का सिलसिला जारी रहा, जिससे राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। सूत्रों के अनुसार, बड़ी संख्या में नेताओं की मौजूदगी के बावजूद भूपेश बघेल के साथ औपचारिक चर्चा केवल तीन से चार वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल करेगा। यह प्रतिनिधिमंडल संगठन से जुड़े मुद्दों और चुनावी रणनीति पर अपनी बात रख सकता है।

पंजाब कांग्रेस में आज सबसे अहम बैठक, नेतृत्व विवाद और 2027 चुनावी रणनीति पर होगा मंथन

CM चेहरे को लेकर उठ सकती है मांग

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान चन्नी समर्थक नेता आगामी विधानसभा चुनाव में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग उठा सकते हैं। हालांकि इस संबंध में कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बैठक में संगठनात्मक एकजुटता, नेतृत्व, कार्यकर्ताओं की भूमिका और चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

राजा वड़िंग की गैरमौजूदगी पर भी चर्चा

इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। उनकी अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बैठक का उद्देश्य संगठन के भीतर संवाद बढ़ाना और सभी पक्षों की राय जानना है। अब सभी की नजर बैठक के नतीजों पर है, क्योंकि इससे यह संकेत मिल सकता है कि पंजाब कांग्रेस नेतृत्व विवाद को किस तरह सुलझाने की कोशिश करेगी और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी किस रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी।

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