
बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले एनडीए के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है। आरएलएम के तीन विधायकों के निर्दलीय प्रत्याशी रामपुकार सिन्हा के समर्थन में उतरने पर आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने उपेंद्र कुशवाहा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरएलएम में कोई उन्हें नेता नहीं मानता।
RLM के तीन विधायक उतरे बागी तेवर में
बिहार विधान परिषद की चार शिक्षक और चार स्नातक सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। इस बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के तीन विधायक—माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक कुमार सिंह—सारण शिक्षक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार रामपुकार सिन्हा के समर्थन में सामने आए हैं। सिन्हा ने सोमवार को नामांकन दाखिल किया था।
सारण सीट पर एनडीए की ओर से जेडीयू के आनंद पुष्कर उम्मीदवार हैं। RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने आधिकारिक तौर पर एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन की बात कही है, जबकि तीन विधायकों का रुख इससे अलग दिखाई दे रहा है।
भाई वीरेंद्र ने उपेंद्र कुशवाहा पर साधा निशाना
मंगलवार को आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आरएलएम का अंदरूनी मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो उपेंद्र कुशवाहा को अपना नेता मानता हो।
भाई वीरेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे, पत्नी और खुद के लिए राजनीति करते हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से पार्टी के लोगों ने अपना-अपना मोर्चा संभाल लिया है। ये टिप्पणियां भाई वीरेंद्र के राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
RLM ने बगावत को बताया पार्टी लाइन
इस पूरे घटनाक्रम में RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार सिंह समेत तीन विधायक रामपुकार सिन्हा के साथ खड़े दिखाई दिए। रिपोर्टों के मुताबिक, उनका कहना है कि सिन्हा लंबे समय से पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और उनका समर्थन कार्यकर्ताओं के सम्मान से जुड़ा है।
वहीं, उपेंद्र कुशवाहा ने तीनों विधायकों को बागी मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन का फैसला किया है। ऐसे में आरएलएम के भीतर सामने आया यह मतभेद चुनाव से पहले पार्टी के लिए चुनौती बन गया है।

चुनाव आयुक्त पर भी भाई वीरेंद्र का बयान
भाई वीरेंद्र ने चुनाव आयोग को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग करते हुए उनके खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक है।
हालांकि, किसी संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ लगाए गए ऐसे राजनीतिक आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि भाई वीरेंद्र के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
8 अक्टूबर को तेजस्वी का लोकभवन मार्च
भाई वीरेंद्र ने बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में 8 अक्टूबर को प्रस्तावित लोकभवन मार्च का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर विपक्ष अपनी आवाज उठा रहा है और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा।
आरजेडी ने घोषणा की है कि 7 अक्टूबर को बिहार के प्रखंड मुख्यालयों पर ‘आक्रोश मार्च’ और 8 अक्टूबर को जिला स्तर पर प्रदर्शन के साथ पटना में लोकभवन मार्च किया जाएगा।
23 अक्टूबर को होगा MLC चुनाव
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। इनमें चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर और नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी।
ऐसे में आरएलएम के तीन विधायकों का अलग रुख और आरजेडी का हमला बिहार की चुनावी राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि चुनाव तक आरएलएम अपने विधायकों को एकजुट कर पाती है या यह मतभेद आगे और गहराता है।
