
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट परिसर में 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं के मार्च और कथित नारेबाजी के मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अदालत की गरिमा और न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिशों को लेकर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने राहुल गांधी और अन्य संबंधित नेताओं को नोटिस जारी करते हुए मामले में जवाब मांगा है।
‘न्यायपालिका को कोई धमका नहीं सकता’
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में हुए विरोध प्रदर्शन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कोर्ट परिसर में जो हुआ, उससे वकील आहत हैं और करीब 200 वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को पत्र लिखा है।
भाटिया ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के जरिए न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “न्यायपालिका को कोई धमका नहीं सकता।”
CJI ने यह भी कहा कि अदालत किसी अलग-थलग जगह पर नहीं बैठी है और बाहर होने वाली गतिविधियों की जानकारी उसे भी रहती है।
‘ये कमजोर प्रयास हैं, इन पर कोई ध्यान नहीं देता’
जब वरिष्ठ वकील ने विपक्षी मार्च को अदालत पर दबाव बनाने की कोशिश बताया, तो मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे प्रयास कमजोर हैं और उन पर कोई ध्यान नहीं देता।
उन्होंने संकेत दिया कि अदालत बाहरी राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होगी और मामलों की सुनवाई कानून के आधार पर ही की जाएगी।

CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन के दौरान अदालत परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। इससे 12 अक्टूबर को कोर्ट परिसर में हुई गतिविधियों की जांच में मदद मिल सकती है।
12 अक्टूबर को निकाला गया था सुप्रीम कोर्ट मार्च
12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था।
विपक्षी नेताओं ने SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी दाखिल की थीं। मार्च के दौरान बड़ी संख्या में लोग सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास पहुंचे थे और परिसर में कथित तौर पर नारेबाजी भी हुई थी।
SIR को लेकर आमने-सामने सरकार और विपक्ष
SIR को लेकर केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच लगातार राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत होने वाली कवायद बता रहा है।
अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी नोटिस के बाद राहुल गांधी और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा। अदालत के सामने यह भी स्पष्ट करना होगा कि 12 अक्टूबर को कोर्ट परिसर में वास्तव में क्या हुआ और प्रदर्शन के दौरान निर्धारित नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
