
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में अब हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें CBI को FIR दर्ज कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने चुनाव का हवाला देते हुए मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची पंजाब सरकार
पंजाब सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दाखिल की। याचिका में हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत CBI को कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने को कहा गया था।
यह मामला State of Punjab v. Nikhil Saraf के नाम से दर्ज है और इसकी डायरी संख्या 62464/2026 है।
विकास सिंह ने की अर्जेंट लिस्टिंग की मांग
पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने CJI सूर्यकांत के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। उन्होंने दलील दी कि पंजाब चुनाव की ओर बढ़ रहा है और ऐसे में मामले की शीघ्र सुनवाई जरूरी है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि हाईकोर्ट का CBI को FIR दर्ज करने का निर्देश उचित नहीं था और मामले में संज्ञेय अपराध के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं था।

ट्रांसफर-पोस्टिंग के आरोपों का मामला
सरकार की ओर से दलील दी गई कि पूरा मामला सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े आरोपों पर आधारित है और राज्य की एजेंसियां पहले से इसकी जांच कर रही थीं।
विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के Vijay Madanlal Choudhary फैसले का हवाला देते हुए कहा कि FIR दर्ज करने की कार्रवाई के लिए संज्ञेय अपराध का आधार होना जरूरी है। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को इसी कानूनी आधार पर चुनौती दी है।
ED के दस्तावेजों पर भी उठाए सवाल
पंजाब सरकार ने ED की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की स्पष्टता पर भी सवाल उठाया है। राज्य की ओर से कहा गया कि दस्तावेज पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे और राज्य की जांच एजेंसी इनकी जांच कर रही थी।
सरकार ने यह दलील भी दी कि चुनाव के समय इस तरह के मामले सामने आने से राजनीतिक और संघीय ढांचे से जुड़े सवाल उठते हैं। हालांकि, ये पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रखी गई दलीलें हैं, जिन पर अभी अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है।
हाईकोर्ट ने क्यों सौंपी थी CBI को जांच?
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को CBI को मामले में FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था। मामला ED की ओर से पंजाब DGP को भेजी गई तीन चिट्ठियों से जुड़ा है।
ED की ओर से राजबीर सिंह घुम्मन और कुछ अन्य लोगों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का जिक्र किया गया था। आरोपों में ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी टेंडर, नीतिगत फैसलों, गोपनीय दस्तावेजों और अन्य सरकारी सुविधाओं को प्रभावित करने के दावे शामिल थे। इन आरोपों की अभी जांच होनी है और किसी अदालत ने इन्हें साबित नहीं किया है।
बुधवार या गुरुवार को हो सकती है सुनवाई
पंजाब सरकार ने मंगलवार को तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उसी दिन सुनवाई नहीं की। CJI सूर्यकांत ने कहा कि मामले को बुधवार को सूचीबद्ध करने की कोशिश की जा सकती है, अन्यथा गुरुवार को सुनवाई हो सकती है।
इस मामले में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश पर रोक लगाने का कोई आदेश सामने नहीं आया है। अब अगली सुनवाई में यह तय होना अहम होगा कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करता है या CBI जांच आगे बढ़ने का रास्ता खुला रहता है।