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समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 के लिए भोपाल में मंथन, CM मोहन यादव ने PM मोदी को बताया ‘जामवंत’

भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनाने की रणनीति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तुलना रामायण के जामवंत से करते हुए कहा कि जिस तरह जामवंत ने हनुमान को उनकी शक्ति का अहसास कराया था, उसी तरह पीएम मोदी ने देश और राज्यों को उनकी क्षमता पहचानने का अवसर दिया है।

वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस की थीम पर कॉन्क्लेव

भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘कंट्रीब्यूशन ऑफ सेंट्रली फंडेड इंस्टीट्यूशंस फॉर समृद्ध मध्यप्रदेश@2047’ कॉन्क्लेव की मुख्य थीम ‘वन इंस्टीट्यूट–वन प्रॉमिस’ रही। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर की। इस दौरान उन्होंने समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 स्मारिका का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने इजराइल और जापान जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद इन देशों ने विकास की नई ऊंचाइयां हासिल की हैं।

कृषि और सिंचाई पर मुख्यमंत्री की चिंता

मुख्यमंत्री ने कृषि क्षेत्र की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, लेकिन युवा पीढ़ी की खेती में रुचि कम होती जा रही है। उन्होंने बताया कि 1956 में राज्य गठन के बाद वर्ष 2002-03 तक सिंचाई क्षमता करीब साढ़े सात लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सकी थी।

समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 के लिए भोपाल में मंथन, CM मोहन यादव ने PM मोदी को बताया ‘जामवंत’

उन्होंने नदी जोड़ो परियोजनाओं को राज्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे बाढ़ नियंत्रण के साथ सिंचाई का क्षेत्र भी बढ़ेगा। राजस्थान के साथ जल बंटवारे के विवाद के समाधान के बाद पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) योजना को भी विकास के लिहाज से अहम बताया गया।

मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश को मैन्यूफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने के लिए रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पेटेंट से जुड़े रोडमैप पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में ‘कौशल नई करेंसी’ और ‘नवाचार नई अर्थव्यवस्था का आधार’ है।

डिजिटल पेमेंट और AI जैसी तकनीकों के इस्तेमाल के जरिए रोजगार, निवेश, उद्यमशीलता और क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।

2047 के विजन में 2029 होगा अहम चेकपॉइंट

मुख्य सचिव अशोक वर्णबाल ने कहा कि समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 का विजन डॉक्यूमेंट विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य का हिस्सा है। उन्होंने वर्ष 2029 को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण ‘चेकपॉइंट’ बताया।

उन्होंने कहा कि सिर्फ औद्योगिक निवेश नहीं, बल्कि ऐसा उत्पादक निवेश जरूरी है जो वैल्यू पैदा करे और मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय वैल्यू चेन से जोड़े। उनके मुताबिक विकसित मध्यप्रदेश का निर्माण सरकार के साथ-साथ समाज, उद्यमियों और नागरिक संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।

केंद्रीय संस्थानों ने दिए विकास के रोडमैप

कॉन्क्लेव में NITTTR ने सेमीकंडक्टर तकनीक, IIIT भोपाल ने साइबर सुरक्षा और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, जबकि भारतीय सेना ने डिफेंस सेक्टर में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल पर सुझाव दिए।

LNIPE ने खेल और शारीरिक शिक्षा के प्रशिक्षण मॉडल, AMPRI ने युवाओं के वैज्ञानिक प्रशिक्षण और रायसेन के जनकपुर को स्मार्ट विलेज बनाने की योजना साझा की। MANIT ने पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे प्रशिक्षण को पाठ्यक्रम से जोड़ने की पहल बताई। IIT इंदौर, IIM इंदौर, IISER भोपाल और SPA भोपाल ने भी राज्य के विकास में तकनीकी और प्रबंधकीय सहयोग की प्रतिबद्धता जताई।

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