
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर हैं लेकिन राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है। दिल्ली में हार के बाद आम आदमी पार्टी के लिए पंजाब अब उसकी राजनीतिक साख बचाने का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी पंजाब में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। कांग्रेस अंदरूनी विवादों से जूझ रही है जबकि शिरोमणि अकाली दल फिर से अपनी खोई राजनीतिक जमीन हासिल करने की कोशिश में लगा है। ऐसे में पंजाब की राजनीति अब केवल सत्ता की लड़ाई नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के भविष्य का बड़ा संकेत मानी जा रही है।
BJP का नया मिशन और AAP पर बढ़ता दबाव
पंजाब में बीजेपी लंबे समय तक शहरी हिंदू और व्यापारी वर्ग तक सीमित रही लेकिन अब पार्टी ग्रामीण और जाट सिख वोट बैंक में भी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को आगे लाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर 2022 में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाली आम आदमी पार्टी अब सत्ता विरोधी माहौल का सामना कर रही है। राज्य में नशे बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे लगातार सरकार को घेर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि ड्रग नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई जबकि सरकार महिला वोटरों को साधने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रही है।

महिला वोट बैंक और कैश ट्रांसफर योजना पर सियासी दांव
पंजाब की राजनीति में महिला वोटर्स हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आम आदमी पार्टी महिलाओं के लिए डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजना लाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि जुलाई से यह योजना लागू की जा सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह योजना एंटी इंकम्बेंसी को कम करने का बड़ा प्रयास है। हालांकि विपक्ष इसे चुनावी लाभ के लिए उठाया गया कदम बता रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस नेतृत्व संकट और गुटबाजी से परेशान दिखाई दे रही है। पार्टी अभी तक स्पष्ट नेतृत्व तय नहीं कर पाई है जिससे उसका पारंपरिक वोट बैंक कमजोर पड़ सकता है।
ड्रग्स बॉर्डर सिक्योरिटी और गठबंधन की राजनीति
पंजाब चुनाव में ड्रग्स और सीमा सुरक्षा बड़ा मुद्दा बनने जा रहे हैं। बीजेपी लगातार राज्य सरकार पर नशा तस्करी रोकने में विफल रहने का आरोप लगा रही है जबकि आम आदमी पार्टी सीमा पार से होने वाली तस्करी के लिए केंद्र सरकार और सीमा सुरक्षा व्यवस्था को जिम्मेदार ठहरा रही है। इसके साथ ही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया ने वोटर लिस्ट को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के संभावित गठबंधन को लेकर हो रही है। अगर दोनों दल फिर साथ आते हैं तो पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि 2027 का चुनाव सामाजिक समीकरण धार्मिक पहचान और कल्याणकारी राजनीति का सबसे बड़ा मुकाबला बनने जा रहा है।
