इटली और फ्रांस में महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, हिंसा-आगजनी और लूटपाट; सैकड़ों गिरफ्तार

पेरिस/मिलान: यूरोप में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ फ्रांस और इटली में बड़े प्रदर्शन हुए। कई जगह शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुए विरोध ने हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, आगजनी और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। हालात संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।
मिलान में प्रदर्शन के दौरान हिंसा
इटली के मिलान में शनिवार को महंगाई और युद्ध के खिलाफ मार्च निकाला गया। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बाद में नकाब पहने कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर और दूसरी चीजें फेंकनी शुरू कर दीं।
इसके बाद शहर के मध्य हिस्से में कई जगह हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। दुकानों में लूटपाट की गई और कुछ संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
दो पुलिसकर्मी घायल, करीब 50 लोग हिरासत में
रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा में कम से कम दो पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं। कई नाबालिगों समेत करीब 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि प्रदर्शन करना लोगों का अधिकार है, लेकिन शहरों को आग के हवाले करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। मिलान के मेयर ग्यूसेप्पे साला ने भी पुलिस के खिलाफ हिंसा और शहर को नुकसान पहुंचाने की आलोचना की।

फ्रांस में भी हिंसक प्रदर्शन
फ्रांस में भी बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को लेकर कई शहरों में प्रदर्शन हुए। राजधानी पेरिस में कुछ कारों को आग के हवाले किया गया और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। फ्रांस में कम से कम 272 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
ल्योन में एक पर्यटन कार्यालय में आग लगने की खबर है, जबकि मार्सिले में दुकानों और नगरपालिका पुलिस स्टेशन को नुकसान पहुंचाया गया। कुछ प्रदर्शनकारी सिटी हॉल की लॉबी में भी दाखिल हो गए।
‘येलो वेस्ट’ आंदोलन की यादें फिर ताजा
फ्रांस में कुछ प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया के जरिए 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन को फिर से सक्रिय करने की अपील की है। उस आंदोलन की शुरुआत भी महंगाई, ईंधन की कीमतों और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को लेकर हुई थी।
इस बार पेट्रोल, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें प्रदर्शनकारियों के गुस्से की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। हालांकि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं के बीच अंतर करते हुए फ्रांस और इटली की सरकारों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया है।
