एफिल टावर विवाद में महिला कर्मचारियों को लेकर हंगामा, CJP संस्थापक ने धर्म के नाम पर नियंत्रण पर सवाल उठाए

पेरिस के प्रतिष्ठित एफिल टावर से जुड़ा विवाद अब धार्मिक आस्था, कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और संस्थागत जवाबदेही की बहस में बदल गया है। महिला कर्मचारियों को कथित तौर पर कुछ क्षेत्रों से हटाने के आरोपों के बाद कर्मचारियों की हड़ताल हुई, जिससे दुनिया के मशहूर पर्यटन स्थल को बंद करना पड़ा।
एफिल टावर विवाद से बढ़ी हलचल
पेरिस के एफिल टावर पर हिंदू धार्मिक संगठन BAPS के प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान कथित तौर पर कुछ महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटाने का मामला सामने आया। कर्मचारियों के विरोध के बाद टावर को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। हड़ताल समाप्त होने के बाद मंगलवार को इसे फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया।
महिला कर्मचारियों को लेकर क्या आरोप हैं?
कर्मचारियों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को विशेष स्थानों से हटने को कहा गया। कुछ जगहों पर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया और कुछ महिला कर्मचारियों को खास रास्तों या क्षेत्रों से गुजरने से रोकने के निर्देश दिए गए। CGT यूनियन से जुड़े कर्मचारियों ने इसे लैंगिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ बताया।

CJP संस्थापक ने जताई नाराजगी
विवाद के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धर्म या आस्था के नाम पर महिलाओं की निगरानी करना, उनके पहनावे या व्यवहार पर नियंत्रण की कोशिश करना और उनकी स्वतंत्रता सीमित करना किसी भी धर्म और देश की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
संचालन कंपनी ने मानी गलती
एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE ने माना कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल की ओर से महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने का अनुरोध किया गया था। कंपनी ने कहा कि ऐसी शर्त स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थी, क्योंकि यह उसके मूल्यों और महिला-पुरुष समानता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। मामले की जांच कर आगे कार्रवाई की बात कही गई है।
BAPS ने आरोपों से किया इनकार
BAPS ने महिला कर्मचारियों को एफिल टावर में प्रवेश से रोके जाने की बात से इनकार किया है। संगठन ने कहा कि उसकी जानकारी के अनुसार किसी को टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया। हालांकि, घटना से किसी को असुविधा हुई हो तो उसने उसके लिए खेद जताया है। यह दौरा पेरिस के पास BAPS मंदिर से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान हुआ था।
विवाद से बड़ा सवाल समानता का
एफिल टावर विवाद ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि धार्मिक मान्यताओं और सार्वजनिक कार्यस्थल के नियमों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन कार्यस्थल पर समान व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अब जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि वास्तव में क्या हुआ था। लेकिन इस घटना ने एक बात साफ कर दी है—किसी भी संस्था की विश्वसनीयता तभी कायम रहती है, जब उसके दरवाजे सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से खुले हों।
