रूस-यूक्रेन दोनों राष्ट्रपति आ सकते हैं भारत, ट्रंप की नाराज़गी बढ़ने की आशंका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और रूस की दोस्ती पर नाराज़गी जताई है। उन्होंने घोषणा की है कि रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब भारत और रूस के बीच ऊर्जा व रक्षा क्षेत्र में गहरी साझेदारी है। हालांकि भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और वह सभी देशों के साथ संतुलित संबंध रखना चाहता है। यही कारण है कि जहां रूस भारत का पुराना रणनीतिक मित्र है, वहीं भारत और यूक्रेन के रिश्ते भी लगातार मज़बूत हो रहे हैं।
यूक्रेन के राष्ट्रपति के भारत दौरे की तैयारी
शनिवार को भारत-यूक्रेन संबंधों की एक नई तस्वीर सामने आई, जब दिल्ली के कुतुब मीनार को यूक्रेन के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से रोशन किया गया। यह पहल यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर की गई थी। इसी बीच भारत स्थित यूक्रेन के राजदूत ओलेक्ज़ांद्र पोलिशचुक ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि दोनों देश भविष्य की रणनीतिक साझेदारी की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। राजदूत ने यह भी जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को भारत आने का न्योता दिया है और फिलहाल दोनों पक्ष तारीख तय करने की प्रक्रिया में हैं। अगर यह यात्रा होती है तो यह भारत-यूक्रेन संबंधों के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी आएंगे भारत
जहां एक ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति का भारत दौरा प्रस्तावित है, वहीं दूसरी ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस साल के अंत तक भारत आने वाले हैं। हाल ही में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इसकी पुष्टि की थी। यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के कई अहम समझौते होने की संभावना है। पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय पर होने जा रही है जब अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है और रूस से तेल आयात को लेकर कड़ा रुख अपनाए हुए है।
अमेरिका की बढ़ती बेचैनी
रूस और यूक्रेन, दोनों राष्ट्राध्यक्षों के भारत आने की संभावना ने अमेरिका की चिंता और बढ़ा दी है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका संबंध किसी एक देश तक सीमित नहीं है। भारत की प्राथमिकता राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा है। राष्ट्रपति ट्रंप का यह निर्णय कि रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगेगा, दरअसल उसी बेचैनी का नतीजा है। इससे पहले भी उन्होंने भारत पर टैरिफ को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का ऐलान किया था। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका की सख़्ती के बीच भारत किस तरह अपने संतुलित कूटनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ाता है।