वाराणसी स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की बड़ी जीत

Varanasi news (Speedbharatnews): वाराणसी स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने एक बार फिर जीत हासिल कर अपनी ताकत दिखा दी है। उन्होंने बीजेपी के केदारनाथ सिंह को 17211 वोटों से हराकर लगातार दूसरी बार एमएलसी बनने का रास्ता साफ कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सपा की इस जीत को बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजों में बीजेपी ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में 5 सीटें आई हैं। वाराणसी में सपा ने शिक्षक और स्नातक दोनों सीटों पर जीत हासिल करके सबको चौंका दिया है। शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव ने जीत दर्ज की जबकि स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा ने बाजी मारी।
आशुतोष सिन्हा की जीत के लिए 16 राउंड तक मतों की गिनती चली। आखिर में उन्होंने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी केदारनाथ सिंह को बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया। इस जीत के साथ उन्होंने विधान परिषद में अपना दूसरा कार्यकाल हासिल किया है।
आशुतोष सिन्हा का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया था। साल 2006 में वह हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में रिकॉर्ड मतों से उपाध्यक्ष चुने गए थे। इसके बाद साल 2007 में उन्होंने छात्र युवा सम्मेलन आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में अखिलेश यादव मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे।
बसपा सरकार के दौरान आंदोलनों में हिस्सा लेने के चलते आशुतोष सिन्हा को साल 2007 और 2011 में गिरफ्तार भी किया गया था। उन्होंने साल 2007 के बलिया लोकसभा उपचुनाव में सपा के समर्थन में प्रचार किया था।
वह युवा अधिवक्ताओं के लिए चैंबर और आर्थिक मदद दिलाने से लेकर बुजुर्ग वकीलों की पेंशन और जरूरतमंद परिवारों को सहायता देने जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय रहे हैं। इसके अलावा वित्तविहीन शिक्षकों और शिक्षामित्रों समेत कई कर्मचारी संगठनों की मांगों को लेकर हुए आंदोलनों में भी उन्होंने भाग लिया।
7 दिसंबर 2020 को आशुतोष सिन्हा पहली बार सपा के टिकट पर वाराणसी खंड से एमएलसी चुने गए थे। साल 2023 और 2024 के दौरान उन्होंने संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति के सभापति की जिम्मेदारी भी संभाली थी। अब दूसरी बार मिली जीत के बाद वाराणसी की राजनीति में उनकी स्थिति और मजबूत हुई है।
