
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने CJP के प्रदर्शनों को लेकर विपक्ष और आंदोलन में शामिल लोगों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ युवाओं को अराजक तत्व गुमराह कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने पूछा कि इन गतिविधियों के लिए पैसा कहां से आ रहा है।
बांग्लादेश जैसे हालात का जिक्र
इंद्रेश कुमार ने आशंका जताई कि कहीं भारत में भी बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिश तो नहीं हो रही। उन्होंने वहां हुई हिंसा और अल्पसंख्यकों से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को ऐसी स्थिति से बचाना जरूरी है। हालांकि उनके ये आरोप राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं और इनके समर्थन में उन्होंने कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
पुराने मुद्दों की जगह नए सवाल
RSS नेता ने कहा कि प्रदर्शनकारी लगातार अपने मुद्दे बदल रहे हैं। उनके मुताबिक पुराने सवालों को पीछे छोड़कर नए मुद्दे उठाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनों में लोगों की भागीदारी भी धीरे धीरे कम हो रही है। उनका सवाल था कि आखिर इन आंदोलनों को लंबे समय तक चलाने के लिए संसाधन कहां से आ रहे हैं।

तिरंगे को लेकर विपक्ष पर निशाना
इंद्रेश कुमार ने प्रदर्शन के दौरान तिरंगे के इस्तेमाल को लेकर भी विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज लोगों को जोड़ने का प्रतीक है और इसका इस्तेमाल किसी राजनीतिक दबाव या विभाजन के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने हर घर तिरंगा अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में पहले ही करोड़ों परिवार तिरंगे से जुड़े हैं।
भारत की लोकतांत्रिक परंपरा पर जोर
अल्बानिया और फ्रांस जैसे देशों से भारत की तुलना को लेकर भी इंद्रेश कुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की अपनी लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक परंपरा है। उनके मुताबिक देश गौतम बुद्ध डॉ बीआर आंबेडकर गुरु नानक महावीर स्वामी भगवान राम और भगवान कृष्ण के विचारों से प्रेरणा लेता है।
युवाओं से की सही रास्ते पर लौटने की अपील
इंद्रेश कुमार ने युवाओं से अपील की कि अगर कोई गलत दिशा में चला गया है तो उसे वापस लौटना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ युवाओं को विदेशी फंडिंग और अराजक तत्वों के प्रभाव में गुमराह किया गया है। ऐसे दावों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच और आधिकारिक प्रमाण जरूरी होंगे।
CJP प्रदर्शनों को लेकर इंद्रेश कुमार के बयान ने फंडिंग आंदोलन की दिशा और युवाओं की भूमिका जैसे सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है लेकिन किसी भी आंदोलन की विश्वसनीयता उसके शांतिपूर्ण तरीके पारदर्शिता और तथ्यों पर टिकी होती है।
