टेक्नॉलॉजी

भारत के टैबलेट बाजार में 32% की भारी गिरावट! लेकिन सैमसंग ने 41% हिस्सेदारी के साथ कायम रखा दबदबा

भारतीय टैबलेट बाजार साल 2025 की पहली छमाही में बड़ी गिरावट का शिकार हुआ है। इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन (IDC) की रिपोर्ट के मुताबिक, टैबलेट शिपमेंट में 32.2 प्रतिशत की साल-दर-साल कमी आई है। इसके बावजूद, जनवरी से जून के बीच 2.15 मिलियन यूनिट्स की शिपमेंट दर्ज की गई। अब सवाल ये है कि इस सुस्त बाज़ार में कौन सी कंपनियां टॉप-5 में अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाब रही?

सैमसंग का दबदबा बरकरार

गिरते बाजार के बावजूद सैमसंग ने आक्रामक ऑनलाइन प्रमोशन और मजबूत मार्केटिंग रणनीति के दम पर सबसे ज्यादा टैबलेट बेचे। कंपनी ने 41.3 प्रतिशत मार्केट शेयर अपने नाम किया और लेनोवो व एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ दिया। वहीं, लेनोवो 12.3 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है। तीसरे नंबर पर एप्पल है, जिसका हिस्सा 11.8 प्रतिशत रहा। शाओमी 11.4 प्रतिशत के साथ चौथे और एसर 9.1 प्रतिशत शेयर के साथ पांचवें स्थान पर है।

भारत के टैबलेट बाजार में 32% की भारी गिरावट! लेकिन सैमसंग ने 41% हिस्सेदारी के साथ कायम रखा दबदबा

क्यों घटा टैबलेट का कारोबार?

IDC की रिपोर्ट बताती है कि भारत में टैबलेट शिपमेंट में गिरावट की सबसे बड़ी वजह कमर्शियल डिमांड का घटना है। खासकर सरकारी शिक्षा योजनाओं में फंडिंग कम होने से टैबलेट की मांग पर बड़ा असर पड़ा। अप्रैल-जून (2Q25) तिमाही में शिपमेंट 42.1 प्रतिशत तक गिरा, जबकि पहली तिमाही में 18.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कमर्शियल शिपमेंट्स में 61.7 प्रतिशत की साल-दर-साल गिरावट आई, जिसमें शिक्षा क्षेत्र के टेंडर में 66.7 प्रतिशत और एंटरप्राइज डिमांड में 26.2 प्रतिशत की कमी हुई।

कंज्यूमर मार्केट ने दिखाई मजबूती

हालांकि, एक तरफ जहां कमर्शियल डिमांड गिरी है, वहीं दूसरी ओर कंज्यूमर मार्केट ने राहत दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, साल की पहली छमाही में कंज्यूमर टैबलेट मार्केट 20.5 प्रतिशत बढ़ा है। अमेज़न प्राइम डे, बैक टू स्कूल प्रमोशन्स और सीजनल सेल कैम्पेन की वजह से ई-कॉमर्स व रिटेल स्टोर्स में बिक्री बढ़ी। इसके अलावा, बड़े स्क्रीन वाले टैबलेट्स, स्टायलस डिवाइस और सस्ते एंट्री लेवल मॉडल्स की डिमांड में इज़ाफा हुआ है।

आगे क्या?

IDC के विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले महीनों में कंज्यूमर डिमांड टैबलेट मार्केट को कुछ हद तक सहारा देती रहेगी। लेकिन अगर सरकारी योजनाओं और कॉर्पोरेट डिमांड में सुधार नहीं हुआ, तो यह सेगमेंट और दबाव झेल सकता है। फिलहाल सैमसंग ने साफ कर दिया है कि सही रणनीति और किफायती रेंज से ही बाजार में बढ़त बनाई जा सकती है।

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