
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने दशहरा के मौके पर जारी वीडियो संदेश में पार्टी के आंदोलन को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से दिवाली तक कोई प्रदर्शन नहीं करने और त्योहार के दौरान परिवार के साथ समय बिताने की अपील की।
आशुतोष और सौरव लेते थे बड़े फैसले
करीब 16 मिनट के वीडियो संदेश में दिपके ने पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास का जिक्र करते हुए कहा कि आंदोलन से जुड़े बड़े फैसले दोनों ही लेते थे। दिपके के मुताबिक, वह उनके निर्देशों का पालन करते थे। उन्होंने दोनों को अपना भाई बताते हुए कहा कि उन्होंने आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यकर्ताओं से परिवार के साथ समय बिताने की अपील
दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि पिछले 10-12 दिनों में आंदोलन से जुड़े लोगों और उनके परिवारों ने काफी मुश्किलों का सामना किया है। ऐसे में त्योहार के समय कुछ समय परिवार और अपनों के साथ बिताना जरूरी है। उन्होंने समर्थकों से फिलहाल आंदोलन से ब्रेक लेने की अपील की।
हिरासत में लिए गए नेताओं की तारीफ
अपने संदेश में दिपके ने न्यायिक हिरासत में भेजे गए सौरव दास और आशुतोष रांका की भी तारीफ की। उन्होंने दोनों को खुद से अधिक सक्षम बताते हुए आंदोलन में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। इस बयान के बाद CJP समर्थकों के बीच दोनों नेताओं की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

मामला पहुंचा दिल्ली हाईकोर्ट
आशुतोष रांका और सौरव दास ने अपनी न्यायिक हिरासत के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों ने उस मजिस्ट्रेट आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उनकी हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं की ओर से जल्द सुनवाई की मांग भी की गई है।
क्राइम ब्रांच कर रही मामलों की जांच
13 अक्टूबर को कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर से जुड़े मामलों में दोनों नेताओं के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कनॉट प्लेस से जुड़ा मामला दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है। जंतर-मंतर से संबंधित मामला भी ट्रांसफर किया गया है। इस बीच CJP की लीगल टीम दोनों नेताओं की रिहाई के लिए कानूनी प्रयास कर रही है।
दिवाली तक क्या रहेगा CJP का रुख?
अभिजीत दिपके की अपील से फिलहाल CJP के आंदोलन को अस्थायी विराम मिलता दिखाई दे रहा है। त्योहार के दौरान प्रदर्शन से दूरी बनाने का फैसला पार्टी के समर्थकों और आंदोलन से जुड़े परिवारों को कुछ राहत दे सकता है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि दिवाली के बाद CJP अपनी आगे की रणनीति क्या तय करती है।
