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गंभीर बीमारियों से बचाव का राज़! हेल्थ और क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस दोनों क्यों हैं जरूरी

आज के समय में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होना बेहद जरूरी हो गया है। लाइफस्टाइल रोगों की बढ़ती संख्या और मेडिकल खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी के कारण स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए यह अहम है। हेल्थ इंश्योरेंस आपकी आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि आपकी पॉलिसी सभी गंभीर और जानलेवा बीमारियों को कवर करे।

 क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस से मिले मदद

कई बार हेल्थ इंश्योरेंस गंभीर बीमारियों के लंबे समय तक चलने वाले इलाज के खर्चों को पूरा नहीं कर पाता। ऐसे में क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस बहुत उपयोगी साबित होता है। SBI जनरल इंश्योरेंस के अनुसार, यह पॉलिसी कैंसर, एंड-स्टेज किडनी फेल्योर, मल्टीपल स्क्लेरोसिस और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के लिए जरूरी है। बीमार होने पर पॉलिसीधारक को अस्पताल खर्चों से अलग एकमुश्त राशि मिलती है।

गंभीर बीमारियों से बचाव का राज़! हेल्थ और क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस दोनों क्यों हैं जरूरी

कवरेज और दायरा

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अधिकांश बीमारियों और हादसों को कवर करती है, जबकि क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस केवल कुछ गंभीर बीमारियों को ही कवर करती है। हेल्थ इंश्योरेंस की प्रीमियम राशि क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस से अधिक होती है। हेल्थ इंश्योरेंस में आप कई बार और कई बीमारियों के लिए दावा कर सकते हैं, लेकिन क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी में केवल एक बार दावा किया जा सकता है।

 गैर-मेडिकल खर्चों के लिए सुरक्षा

हेल्थ इंश्योरेंस केवल अस्पताल खर्चों को कवर करता है, जबकि क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस से मिलने वाली राशि आप घर के खर्चों, लोन की अदायगी या अन्य गैर-मेडिकल जरूरतों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। गंभीर बीमारी से आपकी आय पर भी असर पड़ सकता है। इस स्थिति में एकमुश्त राशि आपके लिए बहुत मददगार साबित होती है।

दोनों पॉलिसी होना जरूरी

हेल्थ इंश्योरेंस और क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस में स्पष्ट अंतर हैं। हेल्थ इंश्योरेंस अस्पताल खर्चों के लिए सुरक्षा प्रदान करता है, जबकि क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी गंभीर बीमारियों से होने वाले भारी वित्तीय बोझ को कम करती है। दोनों पॉलिसियों की जरूरत अलग-अलग है। इसलिए दोनों पॉलिसियों का होना आपके वित्तीय भविष्य की सुरक्षा के लिए बेहद आवश्यक है।

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