Supreme Court ने आवारा कुत्तों के मामलों में रिकॉर्ड संख्या में याचिकाओं पर जताई चिंता

Supreme Court ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर उसके समक्ष दायर हो रही अंतरिम याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता व्यक्त की है। जज विक्रम नाथ और जज संदीप मेहता की संयुक्त पीठ ने कहा कि इंसानों से जुड़े मामलों में भी इतनी अधिक याचिकाएं आम तौर पर नहीं आतीं जितनी इस आवारा कुत्तों के मामले में देखी जा रही हैं। यह टिप्पणी तब आई जब दो वकीलों ने कोर्ट के समक्ष इस विषय पर याचिकाएं प्रस्तुत कीं। सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है क्योंकि यह मामला न केवल जानवरों की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
बुधवार को होगी आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई
Supreme Court ने बुधवार को आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई का निर्णय लिया है। जज विक्रम नाथ, जज संदीप मेहता और जज एन वी अंजारी की तीन सदस्यीय विशेष पीठ इस सुनवाई का नेतृत्व करेगी। अदालत ने बताया कि बुधवार को इस मामले में कई याचिकाओं पर सुनवाई होगी और सभी वकीलों की बात ध्यानपूर्वक सुनी जाएगी। इससे पहले, जब एक वकील ने स्थानांतरण याचिका का जिक्र किया तो कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए बताया कि संबंधित याचिकाओं पर विस्तृत विचार किया जाएगा। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश में आवारा कुत्तों की समस्या और उनसे होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को नियंत्रण में लाने का रास्ता साफ होगा।
पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में आवारा कुत्तों की समस्या को देखते हुए कई अहम निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं में वृद्धि को चिंताजनक बताया था। इसी वजह से कोर्ट ने आदेश दिया कि इन कुत्तों को उचित नसबंदी और टीकाकरण के बाद निर्धारित आश्रयों में स्थानांतरित किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि जो कुत्ते पकड़े जाएंगे उन्हें वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। इसके साथ ही, कोर्ट ने अधिकारियों को राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा मवेशी और पशुओं को हटाने के निर्देश भी दिए थे ताकि वहां से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
प्रशासनिक लापरवाही और कोर्ट का स्वतः संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाओं को प्रशासनिक लापरवाही और प्रणालीगत विफलता करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि खेल परिसरों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के हमलों की पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि प्रशासन इन खतरों को रोकने में नाकाम रहा है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेते हुए कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह स्वतः संज्ञान मामला विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी में बच्चों में रेबीज फैलने की मीडिया रिपोर्ट के संदर्भ में 28 जुलाई 2025 को शुरू किया गया था। कोर्ट की यह पहल आवारा कुत्तों की समस्या को जल्द से जल्द नियंत्रित करने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
