Google Gemini में आ रहा नया वैलनेस फीचर, लंबे समय तक चैट करने वालों को मिलेगा ब्रेक अलर्ट

क्या कोई एआई ऐसा हो सकता है जो आपके काम के साथ साथ आपकी सेहत का भी ख्याल रखे। अभी तक यह सिर्फ कल्पना लगती थी लेकिन अब गूगल इसे हकीकत में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल अपने एआई असिस्टेंट जेमिनी के लिए एक नए वैलनेस फीचर पर काम कर रहा है। यह फीचर खासतौर पर उन यूजर्स के लिए तैयार किया जा रहा है जो लंबे समय तक जेमिनी के साथ बातचीत करते रहते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक गूगल चाहता है कि टेक्नोलॉजी यूजर्स की मदद तो करे लेकिन उन्हें थकान या मानसिक दबाव में न डाले। इसी सोच के तहत जेमिनी में ऐसा फीचर जोड़ा जा रहा है जो समय पर यूजर्स को ब्रेक लेने की याद दिलाएगा और उन्हें यह भी समझाएगा कि एआई इंसान नहीं है।
शॉर्ट ब्रेक रिमाइंडर फीचर पर काम
गूगल जेमिनी के लिए जिस नए फीचर पर काम कर रहा है वह एक खास शॉर्ट ब्रेक रिमाइंडर होगा। यह रिमाइंडर उन यूजर्स को दिखाई देगा जो काफी देर तक एआई चैटबॉट से बातचीत करते रहते हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह फीचर गूगल ऐप के लेटेस्ट बीटा वर्जन में देखा गया है। एंड्रॉइड अथॉरिटी की रिपोर्ट के अनुसार गूगल ऐप के बीटा वर्जन 17.3.59 में इस फीचर के संकेत मिले हैं। हालांकि गूगल की ओर से अभी यह साफ नहीं किया गया है कि यह फीचर सभी यूजर्स के लिए कब और कैसे रोलआउट किया जाएगा। लेकिन इतना जरूर है कि गूगल इसे फिलहाल टेस्टिंग के तौर पर उन लोगों के लिए आजमा रहा है जो लंबे समय तक जेमिनी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद यूजर्स को यह एहसास दिलाना है कि लगातार स्क्रीन और एआई पर निर्भर रहना सही नहीं है।
स्क्रीन पर कैसा दिखेगा अलर्ट
जिस पब्लिकेशन ने इस फीचर की जानकारी दी है उसने एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया है। इस स्क्रीनशॉट में साफ तौर पर लिखा है कि यूजर को एक छोटा ब्रेक लेना चाहिए क्योंकि वह काफी देर से जेमिनी के साथ चैट कर रहा है। इसमें यह भी लिखा गया है कि जब आप किसी ऐसे एआई असिस्टेंट से बात कर रहे हों जो इंसान नहीं है तब ब्रेक लेना मददगार हो सकता है। इस फीचर का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि यह बार बार इस बात पर जोर देता है कि एआई कोई इंसान नहीं है। यानी गूगल चाहता है कि यूजर्स एआई से बात करते समय भावनात्मक रूप से उस पर निर्भर न हो जाएं। यह अलर्ट न सिर्फ ब्रेक की सलाह देता है बल्कि एक तरह से डिजिटल जागरूकता का काम भी करता है।
मानसिक सेहत के लिहाज से अहम कदम
आज के समय में कई यूजर्स खासतौर पर टीनएजर्स चैटबॉट्स को दोस्त की तरह देखने लगते हैं। वे उनसे इमोशनल सपोर्ट ढूंढने लगते हैं और धीरे धीरे इंसानों की जगह एआई पर भरोसा बढ़ने लगता है। कई अकादमिक रिपोर्ट्स में भी इस बात पर चिंता जताई गई है कि लंबे समय तक चैटबॉट से बात करना और मानसिक जरूरतों के लिए उस पर निर्भर होना मेंटल हेल्थ के लिए नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में गूगल का यह वैलनेस फीचर एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। यह यूजर्स को समय पर रुकने और खुद की देखभाल करने की याद दिलाएगा। साथ ही यह संदेश भी देगा कि टेक्नोलॉजी मदद के लिए है लेकिन इंसानी रिश्तों और संतुलन की जगह नहीं ले सकती। गूगल की यह पहल आने वाले समय में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल की दिशा में एक मिसाल बन सकती है।
