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असम विधानसभा चुनाव में भाजपा का 50 प्रतिशत वोट पाने का बड़ा सपना पूरा होगा या नहीं

अगले पांच राज्यों में चुनाव की तैयारियों के बीच असम में उत्साह धीरे-धीरे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवन और गृह मंत्री अमित शाह की असम यात्रा ने राज्य में चुनावी माहौल और अधिक गरमा दिया है। कांग्रेस नेताओं प्रियंका गांधी वाड्रा और DK शिवकुमार की असम आगमन से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है। भाजपा ने राज्य में तीसरे कार्यकाल के लिए बड़ी महत्वाकांक्षा जाहिर की है। नितिन नवन ने हाल ही में असम यात्रा के दौरान बड़ा लक्ष्य तय किया है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा को 50% वोट प्राप्त होना चाहिए। पिछली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने केवल 33.2% वोट हासिल किए थे। अगर यह लक्ष्य पूरा हुआ, तो विपक्ष केवल 20 से 28 सीटों तक सीमित रह सकता है। असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं।

भुपेन बोरा का भाजपा में प्रवेश रणनीति को देगा बल

पूर्व असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भुपेन बोरा का भाजपा में शामिल होना पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा खुले तौर पर हिंदुत्व कार्ड खेल रहे हैं और कांग्रेस के गोगोई को नेपोटिज्म के जरिए निशाना बना रहे हैं। पीएम मोदी ने असम दौरे के दौरान कहा कि कांग्रेस अब मुस्लिम लीग कांग्रेस बन गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध बांग्लादेशियों का मुद्दा उठाया और कहा कि पांच वर्षों में अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट किया जाएगा। भाजपा को उम्मीद है कि हिमंता बिस्वा सरमा की लोकप्रियता और भुपेन बोरा के प्रवेश से पार्टी असम में हेट्रिक जीत दर्ज करेगी। आने वाले दिनों में अगर और कांग्रेस नेता भाजपा में शामिल होते हैं तो विपक्ष की रणनीति प्रभावित हो सकती है।

असम विधानसभा चुनाव में भाजपा का 50 प्रतिशत वोट पाने का बड़ा सपना पूरा होगा या नहीं

भाजपा करेगी मौजूदा विधायकों की टिकट में कटौती

असम में हिमंता बिस्वा सरमा नेतृत्व वाली NDA सरकार के पास कुल 86 विधायकों का समर्थन है, जिसमें भाजपा के 67 विधायक शामिल हैं। चुनाव से पहले भाजपा लगभग 30% मौजूदा विधायकों की टिकट काट सकती है। इसका मतलब है कि लगभग 20 से 25 विधायक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पार्टी ने इसके लिए मल्टी-लेवल सर्वे प्रक्रिया पूरी कर ली है। जिन विधायकों की छवि कमजोर है, वे कम सक्रिय हैं या उम्र में बड़े हैं, उन्हें टिकट कटौती का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी ने पहले भी ऐसे कदम उठाए हैं और सफलता पाई है।

सीट साझा और 50% वोट लक्ष्य

भाजपा अपने NDA सहयोगियों के साथ सीट साझा रणनीति पर भी काम कर रही है ताकि 50% वोट शेयर का लक्ष्य हासिल किया जा सके। पार्टी पिछली 2016 और 2021 की चुनावी सफलताओं का लाभ लेने की योजना बना रही है, जिसमें 60 सीटें जीती गई थीं। हिमंता बिस्वा सरमा की लोकप्रियता, भुपेन बोरा का प्रवेश और चुनावी रणनीति पार्टी को मजबूत स्थिति में लाने का प्रयास कर रहे हैं। असम में भाजपा की यह तैयारी चुनावी समीकरण बदल सकती है और विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

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