आंध्र प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने विजयवाड़ा में वेतन वृद्धि के लिए धरना शुरू किया

आंध्र प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर विजयवाड़ा में धरना दिया। राज्यभर से हजारों कार्यकर्ता धरना चौक पर जुटीं और सामूहिक प्रदर्शन शुरू किया। सरकार की ओर से बातचीत नहीं होने के कारण कार्यकर्ता रातभर धरने पर बैठे रहे। हालांकि तड़के करीब सुबह 5 बजे पुलिस ने धरना स्थल पर कार्रवाई करते हुए कई महिलाओं को उठाकर गिरफ्तार किया। उन्हें एलुरु, सत्तेनपल्ली और नरसरावपेट पुलिस थानों में ले जाया गया। आरोप है कि प्रदर्शन कवर कर रहे मीडिया कर्मियों को रोका गया और कैमरे भी छीने गए।
नेताओं का आरोप- चुनावी वादे अधूरे
CITU की नेता पी. मणि ने कहा कि धरना वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि पिछले चुनावों के दौरान N. Chandrababu Naidu के नेतृत्व वाली सरकार ने वादा किया था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और संबंधित कर्मचारियों के साथ न्याय किया जाएगा, लेकिन 22 महीने बीत जाने के बाद भी कोई फैसला नहीं लिया गया। AP आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स यूनियन की राज्य अध्यक्ष बेबी रानी ने भी सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जो आश्वासन दिए गए थे, वे अब तक लागू नहीं हुए हैं और बढ़ती महंगाई के बीच 7,000 या 11,500 रुपये में जीवन यापन संभव नहीं।

वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग
आंगनवाड़ी सहायिका का वर्तमान वेतन 7,000 और आंगनवाड़ी टीचर का वेतन 11,500 रुपये है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह बढ़ती महंगाई के हिसाब से बेहद कम है। उन्हें सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलती हैं और विकलांगता लाभ तथा अन्य पारिवारिक सहायता योजनाओं में बाधा आती है। नेताओं ने पड़ोसी राज्य तेलंगाना का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आंगनवाड़ी कर्मचारियों को 18,000 रुपये वेतन मिलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तेलंगाना में यह संभव है, तो आंध्र प्रदेश में क्यों नहीं।
पुलिस कार्रवाई और महिला दिवस से पहले विरोध
धरना स्थल पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया। महिलाओं को बिना पूर्व सूचना उठाकर गिरफ्तार करने का आरोप लगाया गया। मीडिया कवरेज को रोकना और कैमरे छीना जाना भी विवादास्पद रहा। यूनियन नेताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले हजारों महिलाओं को सड़क पर बैठने के लिए मजबूर करना और उनके साथ कार्रवाई करना सम्मानजनक नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि महिला दिवस से पहले वेतन वृद्धि की घोषणा कर सम्मानजनक समाधान निकाला जाए।