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वेनेजुएला से सस्ता तेल भारत तक पहुंचेगा या अमेरिका का रहेगा कंट्रोल?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला की अंतरिम सरकार से तेल सप्लाई को लेकर बड़ा ऐलान किया है, जिससे भारत समेत कई देशों को सस्ता क्रूड ऑयल मिलने की उम्मीद जगी है। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला अपनी 30 से 50 मिलियन बैरल की हाई-क्वालिटी तेल की सप्लाई अमेरिका को देगा, जिस पर अब तक प्रतिबंध लगा हुआ था। यह तेल मार्केट प्राइस पर बेचा जाएगा और इसकी कमाई अमेरिका के पास रहेगी, जिसका उपयोग वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के लिए किया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिकी बाजार में तेल की कीमतें करीब 1 डालर प्रति बैरल गिर गईं, जिससे वैश्विक बाजार में हलचल मची है।

वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश

ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका के सैन्य ऑपरेशन के बाद वेनेजुएला में अमेरिकी तेल कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश करेंगी, जिससे वहां की टूटी हुई अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने के साथ-साथ वेनेजुएला से वैश्विक सप्लाई को बढ़ावा देगा। लंबे समय से तेल पर लगी पाबंदियों के कारण वेनेजुएला की आर्थिक हालत बिगड़ी थी, लेकिन अब अमेरिका की अगुवाई में वहां एक स्थिर सरकार बनने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर यह संभव हुआ, तो न केवल वेनेजुएला बल्कि भारत जैसे तेल आयातक देशों को भी फायदा होगा, क्योंकि तेल की कीमतों में गिरावट आएगी और सप्लाई में भी सुधार होगा।

भारत के लिए क्या मायने रखता है वेनेजुएला का तेल?

भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, और वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के भंडार हैं। अमेरिका समर्थित सरकार बनने पर वहां से तेल की सप्लाई पर लगे प्रतिबंध हट सकते हैं, जिससे भारत बड़ी मात्रा में सस्ता क्रूड ऑयल खरीद सकेगा। फरवरी 2021 के बाद पहली बार भारत में कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आई हैं, और अगर वेनेजुएला से रूस की तरह डिस्काउंटेड रेट पर तेल की सप्लाई शुरू होती है, तो भारत को लगभग 13,000 करोड़ रुपये तक की सालाना बचत हो सकती है। यह बचत देश के अन्य विकास कार्यों में भी लगाई जा सकेगी, जिससे आम जनता को भी फायदा मिलेगा।

एक्सपर्ट की राय: अभी वक्त है संभल कर आगे बढ़ने का

हालांकि बाजार में इन खबरों से उत्साह है, लेकिन एबीपी लाइव की बातचीत में IIMC के प्रोफेसर और मार्केट विशेषज्ञ शिवाजी सरकार ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का कंट्रोल भारत को कितना फायदा देगा। अमेरिका कई देशों को अपनी नीतियों के तहत दबाव में रखता है, जिससे भारत को तेल खरीदने के लिए अमेरिका के निर्देशों का पालन करना पड़ता है। वेनेजुएला से सप्लाई भी अमेरिका की मर्जी पर निर्भर होगी। पिछले उदाहरणों से भी पता चलता है कि अमेरिका ने ईरान और रूस से तेल आयात पर कड़ा प्रतिबंध लगाया है। ऐसे में भविष्य में तेल की कीमतें बढ़ेंगी या घटेंगी, यह कहना अभी मुश्किल है। वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम इस दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

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