व्यापार

लगातार तीसरे दिन अमेरिकी बाजारों में गिरावट, एशियाई बाजारों पर भी मंडरा रहा खतरा

गुरुवार को एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला जारी रहा, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में लगातार बिकवाली है। यह बिकवाली वैश्विक निवेशकों के मनोबल पर बुरा असर डाल रही है और इस वजह से न सिर्फ अमेरिका बल्कि एशिया के बाजारों में भी बेचैनी का माहौल बना हुआ है। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स करीब 1.13 प्रतिशत गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था, जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी इंडेक्स लगातार दूसरे दिन लगभग 2 प्रतिशत नीचे आ गया। चीन के बाजारों में मिली-जुली स्थिति देखी गई, जहां शेनझेन इंडेक्स ने बढ़त तो बनाई लेकिन शंघाई इंडेक्स सिर्फ मामूली तेजी दिखा पाया। वहीं, जापान का निक्केई 0.33 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुआ।

AI सेक्टर की अनिश्चितता और निवेशकों की चिंताएं

निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में हो रहे भारी निवेश को लेकर उठ रहे सवाल हैं। निवेशकों को डर है कि एआई पर किया गया भारी खर्च कब और कैसे रिटर्न देगा, इस अनिश्चितता ने टेक स्टॉक्स में बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया है। यह असर अब वैश्विक शेयर बाजारों तक फैल चुका है। इसके अलावा, अमेरिकी चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के संभावित दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जोखिम भरे एसेट्स जैसे चांदी और बिटकॉइन में आई तेजी भी अब फीकी पड़ती नजर आ रही है। निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की कोशिश कर रहे हैं और सतर्क हो गए हैं।

लगातार तीसरे दिन अमेरिकी बाजारों में गिरावट, एशियाई बाजारों पर भी मंडरा रहा खतरा

एंथ्रोपिक के ऐलान ने बढ़ाई बाजार की अस्थिरता

बाजार में हड़कंप मचाने वाली एक और बड़ी वजह क्लाउड-आधारित चैटबॉट बनाने वाले एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक का हालिया ऐलान है। कंपनी ने दावा किया कि उसने ऐसा टूल विकसित किया है जो कई सॉफ्टवेयर एप्लीकेशंस को एक साथ संचालित कर सकता है, जिनमें लीगल सर्विसेज और डेटा मार्केटिंग शामिल हैं। इस घोषणा से निवेशकों को चिंता हुई कि एआई तकनीक कई सेक्टर्स में नौकरियों और बिजनेस मॉडल्स को प्रभावित कर सकती है, जिससे बाजार में और अस्थिरता आ सकती है। इसी के चलते गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में भी भारी गिरावट देखी गई, खासकर नैस्डेक में। बीते तीन दिनों की गिरावट को पिछले साल अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप के ऐलानों के बाद बने हालात से जोड़ा जा रहा है।

कमजोर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने बढ़ाई वैश्विक अनिश्चितता

इसके अलावा, अमेरिकी अर्थव्यवस्था के कमजोर आंकड़े भी बाजार की चिंता को बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 के बाद जॉब ओपनिंग्स में सबसे बड़ी गिरावट आई है, वहीं जनवरी 2026 में कंपनियों द्वारा छंटनी की घोषणाओं में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जो 2009 की वैश्विक मंदी के बाद सबसे अधिक है। इन सभी कारणों से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और डर का माहौल गहरा गया है, जिससे निवेशक जोखिम से बचने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं। इस स्थिति में एशियाई बाजारों में और गिरावट की संभावना जताई जा रही है।

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