जयपुर में गुलाबी हाथी फोटोशूट पर बवाल: क्या रंग बना मौत की वजह या महज संयोग?

जयपुर में एक विदेशी फोटोशूट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामला एक 65 वर्षीय हथिनी “चंचल” से जुड़ा है, जिसे गुलाबी रंग में रंगकर फोटोशूट किया गया था। अब पिछले महीने उसकी मौत के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस रंगाई का उसकी मौत से कोई संबंध है।
इस फोटोशूट को रूसी फोटोग्राफर Julia Buruleva ने अंजाम दिया था। उन्होंने एक मॉडल को हथिनी पर बैठाकर अनोखे अंदाज में तस्वीरें खींचीं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। जहां कुछ लोगों ने तस्वीरों की खूबसूरती की तारीफ की, वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसे जानवरों के प्रति क्रूरता बताया।
हथिनी “चंचल” की मौत के बाद विवाद और गहरा गया। हालांकि, Jaipur Elephant Association और हाथी गांव विकास समिति ने स्पष्ट किया है कि उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। समिति के अध्यक्ष बल्लू खान के अनुसार, फोटोशूट में इस्तेमाल किया गया रंग गुलाल जैसा ऑर्गेनिक था, जिसे कुछ समय बाद हटा दिया गया था और इससे जानवर को कोई नुकसान नहीं हुआ।
इसके बावजूद, कई लोगों ने हाथियों की संवेदनशील त्वचा का हवाला देते हुए इस तरह के प्रयोगों पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि सिर्फ तस्वीरों को आकर्षक बनाने के लिए जानवरों को इस तरह रंगना गलत है, भले ही रंग ऑर्गेनिक ही क्यों न हो। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि ऐसे क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स के लिए AI या डिजिटल एडिटिंग का इस्तेमाल किया जा सकता था।
फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेव ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने राजस्थान की रंगीन संस्कृति से प्रेरित होकर यह कॉन्सेप्ट तैयार किया था। उनके मुताबिक, भारत में त्योहारों और आयोजनों में हाथियों को सजाने की परंपरा रही है, और इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह शूट किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस्तेमाल किया गया रंग पूरी तरह सुरक्षित और प्राकृतिक था।
फिलहाल, यह मामला जानवरों के अधिकार, उनकी सुरक्षा और फोटोशूट जैसे व्यावसायिक उपयोगों को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। सवाल यह है कि क्या परंपरा और कला के नाम पर जानवरों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित है, या इसके लिए सख्त नियमों की जरूरत है।