व्यापार

मिडिल ईस्ट संकट में रूस बना भारत की ऊर्जा ढाल, तेल आपूर्ति में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए रूस से तेल आयात में भारी बढ़ोतरी की है। मार्च 2026 में रूसी तेल सप्लाई 82% बढ़कर 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गई, जिससे भारत की कुल तेल आयात में इसकी हिस्सेदारी 45% से अधिक हो गई है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है।

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने तेल बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है। इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं से भारत को मिलने वाला कच्चा तेल काफी घट गया है। ऐसे में भारत ने तेजी से रणनीति बदलते हुए रूस से आयात बढ़ाकर सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखा।

भारत की रिफाइनरियों और सरकार की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि इस संकट के बावजूद देश में ईंधन की कोई कमी नहीं हुई। भारतीय कंपनियों ने पहले ही बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल खरीदकर भंडारण सुनिश्चित कर लिया था, जिससे उत्पादन प्रक्रिया निर्बाध जारी है।

इस घटनाक्रम में कूटनीतिक सफलता भी देखने को मिली है। पहले जहां अमेरिका भारत पर रूसी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा था, वहीं अब परिस्थितियों को देखते हुए उसने भारत को छूट दे दी है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक साख और स्वतंत्र नीति का संकेत है।

जहां तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों का सवाल है, फिलहाल राहत की स्थिति बनी हुई है। भारत का मजबूत भंडारण तंत्र और लचीली सप्लाई चेन यह सुनिश्चित कर रही है कि आम जनता पर इस संकट का सीधा असर न पड़े। कुल मिलाकर, भारत ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button