टेक्नॉलॉजी

RAM की कीमतें 5 गुना बढ़ीं, आपका नया फोन या कंप्यूटर कितना महंगा होगा?

अगर आप 2026 में नया स्मार्टफोन, लैपटॉप या पीसी खरीदने की सोच रहे हैं तो अपनी जेब संभाल कर रखें। इसकी वजह है एक ऐसी चीज़, जिसके बारे में हम अक्सर ध्यान नहीं देते—RAM यानी रैम। पहले रैम सबसे सस्ता कंप्यूटर कंपोनेंट माना जाता था, लेकिन अब इसकी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका असर हर डिजिटल डिवाइस पर पड़ रहा है। यह बढ़ोतरी आपके डिवाइस की कीमत को भी बढ़ा सकती है।

रैम की कीमतों में अचानक वृद्धि के पीछे क्या वजह है?

अक्टूबर 2025 से रैम की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं। कई मामलों में कंपनियों को पहले की तुलना में चार से पांच गुना ज्यादा कीमतें बताई जा रही हैं। इस अचानक उछाल का एक कारण अकेला नहीं है, बल्कि कई कारण हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का तेजी से फैलना। आज बड़े-बड़े डेटा सेंटर AI को चलाने के लिए बनाए जा रहे हैं। ये डेटा सेंटर हाई परफॉर्मेंस सर्वर और स्पेशलाइज्ड मेमोरी पर निर्भर हैं, जिनमें रैम की खपत बहुत ज्यादा होती है। AI की मांग बढ़ने के साथ रैम की मांग भी तेजी से बढ़ी, लेकिन सप्लाई उससे मेल नहीं खा पाई। इसी वजह से मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर आया और कीमतें लगातार बढ़ती गईं।

हर डिवाइस पर पड़ेगा असर, कंपनियों के लिए भारी पड़ेगा खर्च

रैम केवल कंप्यूटर या लैपटॉप तक सीमित नहीं है, यह स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, मेडिकल डिवाइसेज समेत लगभग हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में इस्तेमाल होता है। इसलिए रैम महंगी होने से पूरा टेक मार्केट प्रभावित होगा। कुछ कंपनियों के पास स्टॉक होने की वजह से अभी कीमतों का असर थोड़ा कम दिख रहा है, लेकिन जिनके पास स्टॉक कम है उन्होंने पहले ही चार से पांच गुना तक कीमतें बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह महंगाई 2026 तक जारी रह सकती है और यहां तक कि 2027 में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण रहेगी। AI में उपयोग होने वाली हाई-एंड मेमोरी ने पूरे बाजार को प्रभावित किया है, जिससे सामान्य यूजर्स के लिए इस्तेमाल होने वाली रैम की कीमतें भी बढ़ गई हैं।

कीमत बढ़ने से ग्राहक पर होगा सीधा असर

कंपनियां इस बढ़ती लागत को खुद वहन करने में असमर्थ हैं। पहले सामान्य लैपटॉप में रैम की कीमत कुल लागत का लगभग 15 से 20 प्रतिशत होती थी, जो अब बढ़कर 30 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के मुनाफे पहले ही सीमित होते हैं, इसलिए इतनी भारी लागत कंपनियों के लिए मुश्किल है। कई सप्लायर्स ने तो कीमतें बताना ही बंद कर दिया है क्योंकि उन्हें और भी महंगाई की उम्मीद है। 2026 तक एक 16GB रैम वाले लैपटॉप की निर्माण लागत लगभग 40 से 50 डॉलर तक बढ़ सकती है। वहीं स्मार्टफोन की कीमत में भी करीब 30 डॉलर का इजाफा हो सकता है। यह बढ़ोतरी सीधे ग्राहकों को झेलनी पड़ेगी।

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