देश

ओवैसी का कांग्रेस पर निशाना, कहा UAPA संशोधन ने बढ़ाई अंडरट्रायल कैदियों की मुश्किलें

असदुद्दीन ओवैसी, AIMIM के अध्यक्ष, ने कांग्रेस पर Unlawful Activities (Prevention) Act या UAPA के कड़े प्रावधानों को बढ़ावा देने के लिए निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने UAPA में संशोधन किया, जिसने कई अंडरट्रायल कैदियों को बिना सजा के लंबे समय तक जेल में रखने का रास्ता खोल दिया। खासकर जब पी. चिदंबरम केंद्रीय गृह मंत्री थे, तब इस कानून में संशोधन हुआ था। ओवैसी ने कहा कि इसी वजह से उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे कई लोगों को अब भी जेल में रखा जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस की इस भूमिका को लोकतंत्र और इंसाफ के खिलाफ बताया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले और UAPA की सख्ती

धुले में एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने दो अंडरट्रायल आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने जमानत न देने के कारण भी स्पष्ट किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में UAPA में संशोधन कर आतंकवाद की व्यापक परिभाषा को शामिल किया गया। इस संशोधन ने कानून को बेहद सख्त और जटिल बना दिया, जिससे आरोपियों के खिलाफ मुकदमों को लंबा खींचा जा रहा है। ओवैसी का कहना था कि ये बदलाव राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं।

UAPA के सेक्शन 43डी की आलोचना

ओवैसी ने UAPA के सेक्शन 43डी की खास तौर पर आलोचना की, जिसमें बिना चार्जशीट के आरोपियों को 180 दिनों तक हिरासत में रखने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इसी प्रावधान के तहत उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य अल्पसंख्यक अभियुक्तों को न्यायिक प्रक्रिया से पहले ही जेल में लंबी अवधि के लिए रखा जा रहा है। ओवैसी ने इस कानून को न्याय प्रणाली के लिए खतरनाक बताया और इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधान अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं और उनकी आवाज दबाने की कोशिश करते हैं।

सच और उम्मीद के बीच बड़ा अंतर

ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि सच और उम्मीद में बहुत बड़ा अंतर होता है। उन्होंने बताया कि कई बार वर्दीधारी अधिकारी नफरत की भावना से भरे होते हैं और इसका असर मुसलमानों जैसी अल्पसंख्यक आबादी पर पड़ता है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह स्थिति जल्द बदलेगी, लेकिन फिलहाल स्थिति बेहद तनावपूर्ण है। यह बयान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिया है, जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज हो गई। वहीं, कोर्ट ने कुछ अन्य आरोपियों को जमानत दी है। ओवैसी ने इस मुद्दे पर लोकतंत्र की रक्षा और मानवाधिकारों की आवाज बुलंद करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button