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शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों के लिए सुरक्षित और स्थिर रिटर्न वाले विकल्प

मार्च के महीने में शेयर बाजार पर भारी दबाव देखने को मिला है। Nifty 50 करीब 11 प्रतिशत तक गिर गया जो वर्ष 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण सामने आए हैं जिनमें पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और Hormuz Strait में सप्लाई बाधित होना प्रमुख है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण महंगाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम भरे बाजार से हटकर सुरक्षित और स्थिर रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

सरकारी योजनाएं बन रही हैं सुरक्षित निवेश का आधार

अनिश्चित बाजार परिस्थितियों में सरकारी योजनाएं निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प मानी जा रही हैं। नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट यानी NSC लगभग 7.7 प्रतिशत रिटर्न देता है और इसकी अवधि 5 साल होती है। यह पूरी तरह सरकार द्वारा समर्थित होता है इसलिए इसमें जोखिम बहुत कम होता है। इसी तरह पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF लंबी अवधि का निवेश है जिसकी अवधि 15 साल होती है और इसमें लगभग 7.1 प्रतिशत रिटर्न मिलता है। इसकी खास बात यह है कि इसमें ब्याज और मैच्योरिटी दोनों ही टैक्स फ्री होते हैं।

शेयर बाजार में गिरावट के बीच निवेशकों के लिए सुरक्षित और स्थिर रिटर्न वाले विकल्प

बॉन्ड और फंड्स में भी मिल रहे हैं विकल्प

RBI द्वारा जारी फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड निवेशकों को करीब 8.05 प्रतिशत तक का रिटर्न दे रहे हैं और इनकी अवधि 7 साल की होती है। इसमें हर 6 महीने पर ब्याज का भुगतान किया जाता है। वहीं सरकारी बॉन्ड यानी G Secs 6 से 7.5 प्रतिशत तक का रिटर्न देते हैं और इन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है हालांकि मैच्योरिटी से पहले बेचने पर कीमत में उतार चढ़ाव हो सकता है। इसके अलावा डेट म्यूचुअल फंड भी एक विकल्प हैं जो सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश करते हैं। इनमें रिटर्न फिक्स नहीं होता लेकिन बाजार के अनुसार स्थिर आय का अवसर प्रदान करते हैं।

कॉर्पोरेट और अन्य निवेश विकल्पों का बढ़ता आकर्षण

निवेशकों के लिए कंपनी डिबेंचर यानी NCD भी एक आकर्षक विकल्प बन रहे हैं जो 7 से 9 प्रतिशत तक रिटर्न दे सकते हैं। इनमें सुरक्षित और असुरक्षित दोनों प्रकार होते हैं और रिटर्न के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। कॉर्पोरेट बॉन्ड और कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट भी बैंक एफडी से अधिक ब्याज देते हैं जो लगभग 7 से 12 प्रतिशत तक हो सकता है लेकिन निवेश से पहले कंपनी की क्रेडिट रेटिंग जांचना जरूरी होता है। इसके अलावा रिकरिंग डिपॉजिट यानी RD छोटे निवेशकों के लिए एक अच्छा विकल्प है जिसमें हर महीने तय रकम जमा कर डिसिप्लिन के साथ बचत की जा सकती है और लगभग 6.7 प्रतिशत तक रिटर्न मिलता है। वर्तमान समय में जब शेयर बाजार में उतार चढ़ाव जारी है तब ये सभी विकल्प निवेशकों को संतुलित और सुरक्षित रिटर्न प्रदान करने में मदद कर रहे हैं।

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