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शेयर बायबैक और म्यूचुअल फंड पर नए टैक्स नियम, जानिए कैसे बचाएं टैक्स

नया वित्तीय वर्ष 2026-27 1 अप्रैल से शुरू हो रहा है और इसके साथ ही इनकम टैक्स एक्ट, 2025 भी लागू हो जाएगा। इस एक्ट के तहत इनकम टैक्स, निवेश, टीडीएस/टीसीएस और कंपनियों से जुड़े कई नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब शेयर बायबैक से होने वाली आय को डिविडेंड नहीं बल्कि कैपिटल गेन माना जाएगा, जिसका टैक्स होल्डिंग पीरियड और खरीद मूल्य पर आधारित होगा। सिक्योरिटीज ट्रेडिंग में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि हुई है, खासकर फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर। इन नए नियमों का असर कर्मचारियों, निवेशकों, कारोबारियों और बड़ी कंपनियों तक सभी पर होगा।

निवेश और इनकम पर नए टैक्स नियम

1 अप्रैल से डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से प्राप्त आय पर ब्याज खर्च के लिए अब कोई कटौती नहीं मिलेगी, चाहे निवेश उधार से किया गया हो। इससे पहले यह डिडक्शन मिलता था, लेकिन नए नियमों ने इसे खत्म कर दिया है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के मामले में भी बदलाव हुए हैं। अब केवल सीधे सरकार से खरीदे गए SGB पर टैक्स छूट मिलेगी, जबकि सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा। इन बदलावों से निवेशकों को अपने निवेश की योजना फिर से बनानी होगी। इसके अलावा, बार-बार डिक्लेरेशन भरने की जरूरत खत्म कर दी गई है, जिससे टैक्स पेयर को काफी राहत मिलेगी।

शेयर बायबैक और म्यूचुअल फंड पर नए टैक्स नियम, जानिए कैसे बचाएं टैक्स

क्रॉस-बॉर्डर प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन अब आसान हो जाएगा क्योंकि नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) से प्रॉपर्टी खरीदते वक्त टीडीएस काटने के लिए TAN नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। अब केवल PAN नंबर से ही TDS कटौती की जा सकेगी। इसके अलावा, विदेशी टूर पैकेज और पढ़ाई/मेडिकल खर्चों पर लगने वाला TCS घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जो विदेश यात्रा और इलाज पर खर्च को कम करेगा। एम्प्लॉयर के लिए भी राहत की खबर है क्योंकि PF और ESI कंट्रीब्यूशन पर टैक्स डिडक्शन अब ITR फाइलिंग डेडलाइन तक जारी रहेगा, जिससे फाइनेंशियल पेनल्टी और कंप्लायंस रिस्क कम होगा।

बढ़ी ITR डेडलाइन और सशस्त्र बलों को बड़ी छूट

मोटर दुर्घटना मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब पूरी तरह से टैक्स-फ्री होगा और उस पर कोई टीडीएस नहीं लगेगा, जिससे पीड़ितों को पूरा मुआवजा मिलेगा। साथ ही, बिना ऑडिट वाले कारोबार और ट्रस्ट की ITR फाइलिंग की डेडलाइन अब 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है, जबकि सैलरीभोगी लोगों के लिए डेडलाइन 31 जुलाई ही रहेगी। सशस्त्र बलों के जवानों को मिलने वाली विकलांगता पेंशन भी अब पूरी तरह टैक्स-फ्री हो गई है। कंपनियों के लिए मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) अब 14 प्रतिशत की फाइनल टैक्स होगी और नया MAT क्रेडिट नहीं दिया जाएगा।

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