व्यापार

विदेशी निवेशकों का बड़ा सफाया, भारत से करोड़ों रुपये की बिकवाली का सिलसिला

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स बढ़ने और डॉलर की मजबूती के बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जनवरी 2026 के पहले 16 दिनों में भारतीय शेयर बाजार से ₹22,530 करोड़ से अधिक की निकासी की है। यह निकासी 2025 में रिकॉर्ड की गई ₹1.66 लाख करोड़ की बिकवाली के बाद आई है। इस बिकवाली के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं, जिनमें मुद्रा की अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार तनाव, अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए संभावित टैरिफ, और बाजार के ऊंचे स्तर शामिल हैं।

FPI निकासी और रुपये पर असर

NSDL के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी के पहले आधे महीने में FPI ने भारतीय शेयर बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकाला है। इस बिकवाली का सीधा असर रुपये की कीमत पर भी पड़ा है। 2025 में रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग पांच प्रतिशत गिर चुका है, जिसका एक बड़ा कारण FPI की लगातार बिकवाली रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां और घरेलू आर्थिक चुनौतियां मिलकर इस स्थिति को जन्म दे रही हैं। विदेशी निवेशक जब विकसित देशों में बेहतर रिटर्न देखते हैं तो वे उभरते बाजारों से अपना पैसा वापस ले लेते हैं।

विशेषज्ञों की राय

सेंटरिसिटी वेल्थटेक के हेड ऑफ इक्विटीज और फाउंडिंग पार्टनर साचिन जसूजा के अनुसार, अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर ने विकसित बाजारों में जोखिम के अनुसार रिटर्न को बेहतर बनाया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि विदेशी पूंजी उभरते बाजारों से विकसित बाजारों की ओर बढ़ रही है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर हिमांशु श्रीवास्तव भी इसी बात पर सहमति जताते हुए कहते हैं कि अमेरिका के उच्च बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती ने अमेरिकी संपत्तियों को अधिक आकर्षक बना दिया है। इसके साथ ही वैश्विक राजनीतिक और व्यापारिक अनिश्चितताएं भी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव

हालांकि FPI की बिकवाली से बाजार पर दबाव था, लेकिन 16 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार ने तेजी दिखाई। उस दिन सेंसेक्स 187.64 अंक यानी 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 83,570.35 पर बंद हुआ। वहीं NSE निफ्टी 50 ने भी 28.75 अंक यानी 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,694.35 पर कारोबार बंद किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी अस्थायी हो सकती है, क्योंकि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित हैं। निवेशकों को बाजार में सतर्कता बरतनी होगी और दीर्घकालिक रणनीति बनाकर ही निवेश करना चाहिए।

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