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PNB लोन फ्रॉड केस में बड़ा फैसला: 3 रिटायर्ड अफसर समेत 9 दोषियों को सजा

गुजरात के अहमदाबाद में स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने बहुचर्चित Punjab National Bank (PNB) लोन धोखाधड़ी मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 9 आरोपियों को दोषी ठहराया है। इस मामले में बैंक के तीन रिटायर्ड अधिकारियों को भी सजा सुनाई गई है। अदालत का यह फैसला बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक अहम संदेश माना जा रहा है।

यह मामला साल 2016 में दर्ज किया गया था, जिसमें मेसर्स काली टेक्सटाइल्स के मालिक शैलेश सतासिया और अन्य लोगों पर बैंक से धोखाधड़ी कर लोन हासिल करने का आरोप था। जांच के दौरान सामने आया कि इस पूरे घोटाले से बैंक को करीब 1.57 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

किन्हें मिली सजा?
अदालत ने रिटायर्ड AGM गुरिंदर सिंह, चीफ मैनेजर केजीसीएस अय्यर और सीनियर मैनेजर के.ई. सुरेंद्रनाथ को 2-2 साल की कठोर कैद और 1-1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, जलपा एंटरप्राइज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संजय पटेल और हितेश डोमाडिया को 3-3 साल की सजा के साथ जुर्माना भी लगाया गया है। अन्य दोषियों—सतीश दावरा, वैशाली दावरा और रमीलाबेन भिकाड़िया—को भी 2-2 साल की सजा और जुर्माना दिया गया है।

कैसे हुआ घोटाला?
इस धोखाधड़ी की शुरुआत जुलाई 2011 में हुई थी, जब आरोपियों ने सूरत स्थित PNB शाखा से 3.70 करोड़ रुपये का टर्म लोन और 40 लाख रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट के लिए आवेदन किया। यह लोन 44 वाटर जेट लूम मशीनों की खरीद और अन्य व्यावसायिक जरूरतों के नाम पर लिया गया था।

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन हासिल किया। बैंक अधिकारियों ने बिना उचित जांच-पड़ताल किए इन दस्तावेजों को सही मान लिया और कर्ज मंजूर कर दिया। यही लापरवाही आगे चलकर बड़े वित्तीय नुकसान का कारण बनी।

CBI जांच में क्या खुलासा हुआ?
Central Bureau of Investigation (CBI) की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बैंक अधिकारियों ने अपने पद की जिम्मेदारी का सही तरीके से पालन नहीं किया। नियमों की अनदेखी और फर्जी दस्तावेजों को नजरअंदाज करने की वजह से बैंक को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

न्यायालय का संदेश
अदालत के इस फैसले को बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। यह स्पष्ट संकेत है कि वित्तीय अनियमितताओं और लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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