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चुनाव से पहले बड़ा दांव, कांग्रेस को झटका देकर बीजेपी में शामिल हुए सांसद

असम की राजनीति में आज एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला। नगांव लोकसभा सांसद Pradyut Bordoloi ने आधिकारिक रूप से कांग्रेस पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब राज्य में राजनीतिक हलचल तेज है। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और असम बीजेपी अध्यक्ष Dilip Saikia की मौजूदगी में पार्टी जॉइन की। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत में नई चर्चा को जन्म दे दिया है और आने वाले चुनावों को लेकर समीकरण बदलने के संकेत भी दे दिए हैं।

मुख्यमंत्री का बयान और बीजेपी की रणनीति

मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने इस मौके पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रद्युत बोरदोलोई का कांग्रेस से पुराना रिश्ता रहा है जो 1975 से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि उनका बीजेपी में शामिल होना पार्टी को और मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि असम बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व को सिफारिश करेगी कि बोरदोलोई को विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया जाए। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि किसी नेता के पास पार्टी में रहने का सम्मान या कारण नहीं है तो वहां बने रहने का कोई मतलब नहीं है। बीजेपी का लक्ष्य अब और अधिक कांग्रेस नेताओं को अपनी ओर आकर्षित करना है।

चुनाव से पहले बड़ा दांव, कांग्रेस को झटका देकर बीजेपी में शामिल हुए सांसद

एक दिन में बदला सियासी सफर

Pradyut Bordoloi ने बीजेपी में शामिल होने से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस से अपने सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को एक पंक्ति का इस्तीफा पत्र भेजा। इसके बाद महज 24 घंटे के भीतर उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया। इस तेजी से हुए घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम में असम बीजेपी की पूरी टीम सक्रिय रही और इसे एक सुनियोजित रणनीति के तहत अंजाम दिया गया।

चुनावी समीकरण पर पड़ेगा असर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से असम में चुनावी समीकरण पर बड़ा असर पड़ सकता है। नगांव जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से आने वाले नेता का दल बदलना कांग्रेस के लिए झटका माना जा रहा है। वहीं बीजेपी इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में देख रही है। आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका असर साफ नजर आ सकता है। बीजेपी लगातार अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है और विपक्ष के नेताओं को अपने साथ जोड़कर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। इस घटनाक्रम के बाद असम की राजनीति में नए गठजोड़ और रणनीतियों की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।

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