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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पक्की, क्या भारतीय सामानों पर खत्म होंगे सारे टैरिफ?

भारत और अमेरिका के बीच लंबी बातचीत के बाद मंगलवार को एक महत्वपूर्ण ट्रेड डील पर सहमति बन गई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जेमिसन ग्रीर ने इस डील को ‘रोमांचक’ बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर समझौता हो चुका है। अभी कुछ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं और जल्द ही यह डील कागजी रूप से भी पूरी हो जाएगी। इस समझौते से भारत के बाजारों में अमेरिकी निर्यातकों की पहुंच बढ़ेगी, वहीं भारत को कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण देने की भी अनुमति मिलेगी।

डील से अमेरिका को बड़ी जीत, भारत पर टैरिफ में बड़ा बदलाव

ग्रीर ने इस डील को अमेरिका के लिए बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ बढ़ते ट्रेड घाटे को देखते हुए अमेरिका भारतीय सामानों के आयात पर लगभग 18 प्रतिशत टैरिफ बनाए रखेगा। हालांकि, भारत ने अमेरिकी निर्यात पर टैरिफ कम करने का वादा किया है। इसमें कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान, रसायन, और मेडिकल उपकरण प्रमुख हैं। ग्रीर ने बताया कि इससे अमेरिकी निर्यातकों को भारतीय बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे और एक्सपोर्ट मार्केट एक्सेस में काफी बढ़ोतरी होगी।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पक्की, क्या भारतीय सामानों पर खत्म होंगे सारे टैरिफ?

भारत पर टैरिफ जीरो? बड़ी उम्मीदें और सशर्त संरक्षण

डील के तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक सामानों पर लगने वाला लगभग 13.5 प्रतिशत टैरिफ लगभग हर सामान के लिए शून्य कर देगा। इसका मतलब यह है कि 98-99 प्रतिशत वस्तुओं पर टैरिफ खत्म हो जाएगा। कृषि क्षेत्र में भी मेवे, शराब, स्पिरिट, फल और सब्जियां जैसी वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती होगी। हालांकि, ग्रीर ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी तरह के अन्य देशों की तरह कुछ संवेदनशील सेक्टर्स को संरक्षण देगा और अपनी नियंत्रण नीतियां जारी रखेगा। साथ ही, दोनों देश एक्सेस बढ़ाने के लिए निरंतर काम करते रहेंगे।

नॉन-टैरिफ बाधाओं में कमी और भारतीय स्टैंडर्ड्स का सम्मान

ग्रीर ने यह भी बताया कि भारत उन नॉन-टैरिफ बाधाओं को काफी हद तक कम करने पर सहमत हो गया है, जो अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश को रोक रही थीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने उत्पादों की सुरक्षा और प्रभावशीलता के लिए विश्वसनीय मानकों का पालन करता है और इसके लिए भारत ने अमेरिकी स्टैंडर्ड्स को पहचानने का रास्ता बनाने पर भी सहमति जताई है। हालांकि, भारत अभी अपनी नियामक प्रक्रियाओं और राजनीतिक निर्णयों पर कायम रहेगा। इस समझौते को दोनों देशों के लिए व्यापार बढ़ाने का एक बड़ा अवसर माना जा रहा है।

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