India-EU फ्री ट्रेड डील पर मुहर, कारें-शराब सस्ती, भारतीय कंपनियों पर बढ़ा दबाव

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच आखिरकार ऐतिहासिक फ्री ट्रेड डील पर सहमति बन गई है। मंगलवार को इस समझौते पर मुहर लगते ही इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जाने लगा। यह डील ऐसे समय पर हुई है जब वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ। सप्लाई चेन की कमजोरी। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते अस्थिर वैश्विक हालात। इन सभी वजहों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव बना हुआ था। ऐसे माहौल में भारत और EU का साथ आना दोनों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। इस समझौते से दोनों पक्षों के बीच व्यापार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है और आने वाले वर्षों में आर्थिक रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं।
आयात-निर्यात पर बड़े बदलाव
भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत भारत से यूरोप को भेजे जाने वाले लगभग 99.5 प्रतिशत सामानों पर ड्यूटी कम या खत्म की जाएगी। इसमें सीफूड और फुटवियर जैसे अहम उत्पाद शामिल हैं। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को यूरोपीय बाजार में बड़ी राहत मिलेगी और उनके प्रोडक्ट्स ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। दूसरी ओर भारत भी EU से आयात होने वाले करीब 96.6 प्रतिशत सामानों पर टैरिफ घटाएगा या पूरी तरह समाप्त करेगा। इसमें यूरोपीय ऑटोमोबाइल और शराब जैसे हाई वैल्यू प्रोडक्ट्स शामिल हैं। इस डील का मकसद दोनों पक्षों के लिए बाजार खोलना और व्यापारिक बाधाओं को कम करना है ताकि ट्रेड फ्लो में तेजी आए और निवेश के नए रास्ते खुलें।
कंज्यूमर्स और इंडस्ट्री को क्या फायदा
इस ट्रेड डील का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलने वाला है। भारत में यूरोपीय कारें पहले के मुकाबले सस्ती हो सकती हैं। साथ ही प्रीमियम और मिड-रेंज वाइन। स्पिरिट्स। बीयर। जैतून का तेल। प्रोसेस्ड फूड। कीवी और नाशपाती जैसे फल। भेड़ का मांस और सॉसेज जैसे मीट प्रोडक्ट्स की कीमतों में भी कमी आने की उम्मीद है। इंडस्ट्री के नजरिए से देखें तो मशीनरी। इलेक्ट्रिकल उपकरण। मेडिकल डिवाइस। फार्मास्यूटिकल्स। केमिकल्स। प्लास्टिक। आयरन और स्टील। एयरोस्पेस कंपोनेंट्स के आयात पर लागत घटेगी। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर। हेल्थकेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को उत्पादन लागत कम करने और कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारतीय कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती
जहां एक ओर यह डील फायदे लेकर आई है वहीं कुछ भारतीय सेक्टर्स के लिए यह चुनौती भी बन सकती है। खासतौर पर शराब उद्योग पर इसका असर साफ दिख रहा है। भारत ने यूरोपीय शराब पर टैरिफ में भारी कटौती की है। वाइन पर ड्यूटी घटाकर 20 प्रतिशत। स्पिरिट्स पर 40 प्रतिशत और बीयर पर 50 प्रतिशत कर दी गई है। इससे भारतीय शराब कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ने वाली है। एलारा सिक्योरिटीज के करण तौरानी के मुताबिक यह भारतीय शराब निर्माताओं के लिए नकारात्मक खबर है। वहीं ऑटो सेक्टर में भी मुकाबला कड़ा होगा। यूरोप से आयात होने वाली कारों पर टैरिफ 110 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। ऐसे में मर्सिडीज। बीएमडब्ल्यू। ऑडी और फॉक्सवैगन जैसी कंपनियां भारतीय बाजार में आक्रामक हो सकती हैं। इसका असर शेयर बाजार में भी दिखा है जहां महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर यह डील भारत के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आई है।
